शह मात The Big Debate: उधर दो साल की बड़ाई.. इधर धान पर लड़ाई! कई खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था पर बवाल, क्या प्रदेश में पूरा हो जाएगा लक्ष्य?
उधर दो साल की बड़ाई.. इधर धान पर लड़ाई! Chaos erupts at several paddy procurement centres in Chhattisgarh
रायपुरः 31 जनवरी तक धान खरीदी की तय तारीख के भीतर क्या इस बार 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का टार्गेट पूरा हो पाएगा? क्योंकि अभी तक की रफ्तार और कुल खरीदी बेहद सुस्त है। विपक्ष का कहना है कि ये सब पहले से तय है कि सरकार चाहती नहीं है कि किसान ज्यादा धान बेचे और तो और अब कुछ बयानों से ऐसे संकेत मिलने लगे हैं। टार्गेट पूरा किया जाए ये जरूरी नहीं तो क्या वाकई इस बार लक्ष्य से कम धान खऱीदा जाएगा? क्या विपक्ष के आरोप सही हैं कि धान खरीदी को लेकर शुरू से सरकार की मंशा और मंतव्य यही था।
छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीदी की शुरुआत हुई। अभी तक प्रदेश के किसान 87 लाख मीट्रिक टन धान बेच चुके हैं। 31 जनवरी तक धान खरीदी होना है, यानि अब शनिवार-रविवार को छोड़ दें तो धान खरीदी के लिए लगभग 20 दिन ही बचे हैं। इस बार धान के लिए 160 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी का टार्गेट रखा गया, जबकि बीते साल रिकॉर्ड 149 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया था। इस बार एग्रीस्टेक पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन से लेकर, टोकन तुहंर द्वार जैसे सुधारों के साथ धान खरीदी की शुरूआत धीमी हुई। उस पर से कर्मचारियों की हड़ताल और मांग के मुताबिक धान खरीदी की लिमिट ना बढ़ाने को लेकर भी किसान ज्यादा धान बेच पाए। विपक्ष के फिर आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार जानबूझकर धान खरीदी कम कर रही है, विपक्ष का दावा है कि इस रफ्तार से पिछले साल का रिकॉर्ड भी छू ना पाएंगे।
इधर, कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए, कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने दावा किया कि व्यवस्था में कोई दोष नहीं है, कहीं-कोई भी किसान परेशान नहीं है। छत्तीसगढ़ में बीते कई सालों से रिकॉर्ड धान खरीदी होती रही है। इस साल भी सरकार ने 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी की तैयारी की। लेकिन अभी तक केवल 87 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी के आंकड़े से सवाल जरूर है कि क्या बचे दिनों में लक्ष्य पूरा होगा, उससे भी बड़ा सवाल ये है कि क्या जानबूझकर खरीदी को हतोत्साहित किया गया?

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