शह मात The Big Debate: उधर दो साल की बड़ाई.. इधर धान पर लड़ाई! कई खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था पर बवाल, क्या प्रदेश में पूरा हो जाएगा लक्ष्य?

उधर दो साल की बड़ाई.. इधर धान पर लड़ाई! Chaos erupts at several paddy procurement centres in Chhattisgarh

शह मात The Big Debate: उधर दो साल की बड़ाई.. इधर धान पर लड़ाई! कई खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था पर बवाल, क्या प्रदेश में पूरा हो जाएगा लक्ष्य?
Modified Date: January 4, 2026 / 12:11 am IST
Published Date: January 4, 2026 12:11 am IST

रायपुरः 31 जनवरी तक धान खरीदी की तय तारीख के भीतर क्या इस बार 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का टार्गेट पूरा हो पाएगा? क्योंकि अभी तक की रफ्तार और कुल खरीदी बेहद सुस्त हैविपक्ष का कहना है कि ये सब पहले से तय है कि सरकार चाहती नहीं है कि किसान ज्यादा धान बेचे और तो और अब कुछ बयानों से ऐसे संकेत मिलने लगे हैं टार्गेट पूरा किया जाए ये जरूरी नहीं तो क्या वाकई इस बार लक्ष्य से कम धान खऱीदा जाएगा? क्या विपक्ष के आरोप सही हैं कि धान खरीदी को लेकर शुरू से सरकार की मंशा और मंतव्य यही था

छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीदी की शुरुआत हुईअभी तक प्रदेश के किसान 87 लाख मीट्रिक टन धान बेच चुके हैं31 जनवरी तक धान खरीदी होना है, यानि अब शनिवार-रविवार को छोड़ दें तो धान खरीदी के लिए लगभग 20 दिन ही बचे हैंइस बार धान के लिए 160 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी का टार्गेट रखा गया, जबकि बीते साल रिकॉर्ड 149 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया थाइस बार एग्रीस्टेक पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन से लेकर, टोकन तुहंर द्वार जैसे सुधारों के साथ धान खरीदी की शुरूआत धीमी हुईउस पर से कर्मचारियों की हड़ताल और मांग के मुताबिक धान खरीदी की लिमिट ना बढ़ाने को लेकर भी किसान ज्यादा धान बेच पाएविपक्ष के फिर आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार जानबूझकर धान खरीदी कम कर रही है, विपक्ष का दावा है कि इस रफ्तार से पिछले साल का रिकॉर्ड भी छू ना पाएंगे।

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इधर, कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए, कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने दावा किया कि व्यवस्था में कोई दोष नहीं है, कहीं-कोई भी किसान परेशान नहीं हैछत्तीसगढ़ में बीते कई सालों से रिकॉर्ड धान खरीदी होती रही हैइस साल भी सरकार ने 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी की तैयारी की लेकिन अभी तक केवल 87 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी के आंकड़े से सवाल जरूर है कि क्या बचे दिनों में लक्ष्य पूरा होगा, उससे भी बड़ा सवाल ये है कि क्या जानबूझकर खरीदी को हतोत्साहित किया गया?


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सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।