छत्तीसगढ़: पुलिसकर्मी की मौत के 42 दिन बाद ‘स्वस्थ होने’ का संदेश आया, पत्नी ने कार्रवाई की मांग की

छत्तीसगढ़: पुलिसकर्मी की मौत के 42 दिन बाद ‘स्वस्थ होने’ का संदेश आया, पत्नी ने कार्रवाई की मांग की

छत्तीसगढ़: पुलिसकर्मी की मौत के 42 दिन बाद ‘स्वस्थ होने’ का संदेश आया, पत्नी ने कार्रवाई की मांग की
Modified Date: August 12, 2026 / 12:37 pm IST
Published Date: August 12, 2026 12:37 pm IST

रायपुर/अंबिकापुर, 12 अगस्त (भाषा) छत्तीसगढ़ के जशपुर निवासी पुलिस आरक्षक की मौत के 42 दिनों बाद आयुष्मान योजना से ‘आप स्वस्थ होकर घर जा रहे हैं’ का मैसेज आने के बाद उनकी पत्नी ने अनियमितता की आंशका जताते हुए मामले की जांच की मांग की है। वहीं, अस्पताल ने इसे तकनीकी चूक मानते हुए संबंधित डाटा एंट्री ऑपरेटर को हटा दिया है।

जशपुर जिले के निवासी पुलिस आरक्षक देवनारायण राम (39) की पत्नी सीमा कुजूर ने एक वीडियो संदेश जारी कर बताया कि उनके पति की तबीयत ठीक नहीं होने के कारण उन्हें 26 जून को अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान 30 जून को उनकी मृत्यु हो गई।

कुजूर ने बताया कि देवनारायण की मृत्यु के 42 दिनों बाद उन्हें आयुष्मान सारथी से वाट्सऐप पर एक संदेश आया, ‘‘हमें खुशी है कि आप स्वस्थ्य होकर घर लौट रहे हैं।’’

कुजूर ने इस इस संदेश को परिवार के लिए पीड़ादायक बताया और अनियमितता की आंशका जताते हुए मामले की जांच की मांग की।

उन्होंने वीडियो संदेश में कहा, ‘‘मैं सीमा कुजूर स्टाफ नर्स के पद पर जशपुर जिले में पदस्थ हूं। मेरा गांव मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के बगिया गांव से छह-सात किलोमीटर की दूरी पर है। मैं अपने पति देवनारायण राम को इलाज के लिए 26 जून को अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज लेकर गई थी। इलाज के दौरान उनकी 30 जून को मृत्यु हो गई। उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। आधिकारिक मृत्यु प्रमाणपत्र भी जारी हो गया है। इसके बावजूद आयुष्मान सारथी की ओर से 42 दिनों बाद मुझे मैसेज आता है, जिसमें लिखा था ‘प्रिय देवनारायण राम हमें खुशी हो रही है कि आप स्वस्थ्य होकर घर जा रहे हैं’।’’

कुजूर ने कहा, ‘‘आप सोच सकते हैं कि एक मृत व्यक्ति कि लिए इस तरह का संदेश आना, उनके परिवार के लिए कितना पीड़ादायक है। … यह अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ आप अनुमान लगा सकते हैं कि आम जनता, गरीब और आदिवासियों के साथ क्या हो सकता है। मैं पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग करती हूं। जांच में जो भी कर्मचारी जिम्मेदार होंगे उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। जिससे आम लोग, स्वास्थ्य व्यवस्था पर विश्वास कर सकें। किसी भी व्यक्ति के साथ इस प्रकार की अनहोनी न हो।’’

कुजूर ने आयुष्मान सारथी की ओर से आए कथित संदेश को साझा किया जिसमें मरीज को अस्पताल से छुट्टी देने का विवरण दिया गया है। इसमें भर्ती की तारीख 26 जून 2026 और छुट्टी देने की तारीख छह अगस्त 2026 तथा अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि 42 दिन अंकित है।

अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ने कहा है कि डाटा एंट्री ऑपरेटर द्वारा जानकारी दर्ज करने में देरी हुई।

अस्पताल ने मंगलवार को एक बयान में कहा, ‘‘देवनारायण राम को 26 जून शल्य क्रिया विभाग अंतर्गत आईसीयू में भर्ती किया गया था। उपचार के दौरान 30 जून को उनकी मृत्यु हो गई। मरीज की भर्ती अवधि कुल पांच दिन रही। इस अवधि में आईसीयू तथा रक्त चढ़ाने के एवज में कुल व्यय राशि 16,700 रुपये का दावा किया गया। वहीं संबंधित मरीज के आयुष्मान कार्ड खाते में 4,74,800 रुपये की राशि शेष है।’’

बयान के मुताबिक, ‘‘आयुष्मान भारत योजना के तहत दावा प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में संदेश मरीज को भेजा जाता है। सामान्यतः इस प्रक्रिया में आठ से 10 दिन का समय लगता है। इसके बाद आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण कर दावे की राशि जारी करने की कार्यवाही नियमानुसार संपादित की जाती है। इस प्रकरण में संबंधित विभाग के डाटा एंट्री ऑपरेटर की ओर से देरी की गई। इसी वजह से पोर्टल पर जानकारी मरीज की मुत्यु के 42 दिन बाद छह अगस्त को अपडेट हुई।’’

अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शैलेंद्र गुप्ता ने बताया कि यह एक संवेदनशील मामला है, जिसमें डाटा एंट्री आपरेटर को समय पर आयुष्मान कार्ड को बंद कर देना चाहिए था। लेकिन उसने देरी की। उन्होंने बताया कि उक्त डॉटा एंट्री ऑपरेटर को संबंधित कार्य से हटा दिया गया है।

भाषा सं संजीव सिम्मी धीरज

धीरज


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