रायपुर, 17 मार्च (भाषा) छत्तीसगढ़ में पुलिस की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो/आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (एसीबी/ईओडब्ल्यू) ने मंगलवार को रायपुर जिले में भारतमाला सड़क परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे के वितरण में कथित अनियमितताओं के मामले में मुख्य फरार आरोपी को गिरफ़्तार कर लिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि एसीबी/ईओडब्ल्यू ने पिछले वर्ष रायपुर जिले के अभनपुर इलाके के कुछ गांवों में रायपुर-विशाखापत्तनम आर्थिक गलियारे के लिए 2021-22 में अधिग्रहण के दौरान जमीन का नामांतरण, मालिकाना हक के हस्तांतरण और अन्य राजस्व प्रक्रियाओं में कथित धोखाधड़ी को लेकर एक मामला दर्ज किया था। इस धोखाधड़ी के कारण सरकारी खजाने को लगभग 32 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।
उन्होंने बताया कि एजेंसी ने अभनपुर में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) रहे आरोपी निर्भय कुमार साहू को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी साहू जमीन अधिग्रहण के लिए सक्षम प्राधिकारी के पद पर तैनात था। वह लंबे समय से फरार था।
अधिकारियों ने बताया कि साहू के खिलाफ अपने पद का दुरुपयोग कर अपने अधीनस्थ पटवारी, राजस्व निरीक्षक, जमीन कारोबारी हरमीत सिंह खनूजा, उमा तिवारी व अन्य के साथ साठगांठ कर भ्रष्टाचार करने का आरोप है।
उन्होंने बताया कि साहू ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से अभनपुर तहसील के नायकबांधा, उगेतरा, उरला, भेलवाडीह, टोकरा के प्रभावित भूमि को पिछली तिथि में विभिन्न उपखंडों में विभक्त कर वास्तविक मुआवजे से कई गुना अधिक मुआवजा राशि वितरित की तथा नायकबांधा जलाशय की पूर्व में अधिग्रहित भूमि को भारतमाला परियोजना के लिये फिर से अधिग्रहित कर मुआवजा प्रदान किया। इससे सरकार को करोड़ों रुपये की आर्थिक हानि हुई।
अधिकारियों ने बताया कि अधिकारी ने उच्चतम न्यायालय में जमानत याचिका दायर की थी जिसे निरस्त कर दिया गया था। इनके और फरार चल रहे अन्य लोकसेवकों के विरुद्ध पूर्व में विशेष न्यायालय से स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था।
उन्होंने बताया कि आरोपी साहू को गिरफ्तार कर पूछताछ के लिए विशेष अदालत में प्रस्तुत किया गया जहां से उसे 30 मार्च तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया।
पिछले साल अक्टूबर में एसीबी/ईओडब्ल्यू ने कथित भारतमाला परियोजना जमीन मुआवज़ा घोटाले में अपनी पहला आरोप पत्र दाखिल किया था, जिसमें 10 आरोपियों के नाम थे। इनमें दो सरकारी कर्मचारी भी शामिल थे। कर्मचारियों को पहले ही गिरफ्तार किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि ईओडब्ल्यू की जांच में पता चला है कि राजस्व अधिकारियों और दलालों के बीच मिलीभगत के बाद जमीन के टुकड़ों की हदबंदी की गई थी। नायकबांधा, टोकरो और उरला गांवों में जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके जमीन का म्यूटेशन किया गया था और दस्तावेजों में पिछली तारीखों की एंट्री करके उन्हें तैयार किया गया था।
जांच एजेंसी ने दावा किया कि जाली रिकॉर्ड के आधार पर कथित तौर पर बढ़ा-चढ़ाकर मुआवज़े का दावा किया गया और उसका भुगतान किया गया, जिससे सरकार को अनुमानित तौर पर 28 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
आरोप पत्र के मुताबिक नायकबांधा गांव में उस जमीन के लिए दोबारा मुआवजा देने से सरकार को कथित तौर पर दो करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ, जिसे पहले ही एक जलाशय के लिए अधिग्रहित किया जा चुका था।
अधिकारियों ने बताया कि कुल मिलाकर, इस कथित घोटाले से सरकारी खजाने को लगभग 32 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
भाषा
संजीव रवि कांत