CG Vidhan Sabha Special Session/Photo Credit: IBC24
रायपुरः Chhattisgarh Assembly Session छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज 33% महिला आरक्षण पर करीब 10 घंटे से ज्यादा समय तक चर्चा हुई। सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच कई बार तीखी नोंक-झोंक भी हुई। इस बीच विपक्ष ने सदन का बहिष्कार कर दिया, जिसके बाद विधानसभा में शासकीय संकल्प विपक्ष की गैरमौजूदगी में पारित किया गया। एक दिवसीय सत्र में चर्चा के दौरान महिला आरक्षण पर कौन, कब, कैसे चूका इसके साथ-साथ महिला अत्याचार, अधूरा वादे से लेकर महिला आरक्षण की राह में रोड़ा कौन इस पर बहस गर्माई। दोनों पक्ष महिलाओं को उनका हक देने के पक्ष में हैं, आरक्षण जल्द देने के पक्ष में हैं तो फिर सवाल ये है कि विरोध कहां हैं? ये आजादी के इतने सालों से अटका क्यों है? क्या इस सत्र के बाद महिलाओं को राहत मिलेगी?
Chhattisgarh Assembly Session छत्तीसगढ़ विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में महिलाओं को 33% आरक्षण को लेकर शासकीय संकल्प पेश किया गया। सदन में पेश शासकीय संकल्प में देश की संसद समेत, सभी विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने का प्रस्ताव पेश हुआ, जिस पर बहस की शुरूवात की सत्तापक्षी की विधायक लता उसेंडी ने सदन में सत्तापक्ष ने कांग्रेस को महिला आरक्षण विरोधी बताया। याद दिलाया कैसे आजादी के बाद से अब तक की कांग्रेस महिलाओं के आरक्षण को लागू करा पाने में नाकाम रही, वहीं कांग्रेस ने बीजेपी की नीयत पर सवाल उठाते हुए चैलेंज देते हुआ कहा कि, सरकार सियासी नौटंकी छोड़ कर अभी 33% आरक्षण लागू करे।
विपक्ष ने सरकार पर दावे के मुताबिक निंदा प्रस्ताव की बात कहकर, शासकीय संकल्प पर चर्चा कराने पर भी सवाल उठाए। महिला अधिकारों पर छिड़ी बहस में रसोई गैस से लेकर अंबेडकर अपमान जैसे मुद्दे गूंजे। कुल मिलाकर एक दिवसीय सत्र का सार वही निकला। बीजेपी साबित करना चाहती है कि महिला आरक्षण का विरोधी कांग्रेस है, जनता तक बात पहुंचे। सारे फैक्ट्स और बयान रिकॉर्ड पर आएं। विपक्ष इसे सत्तापक्ष का दोहरा चरित्र बता रहा है, विपक्ष ने चैलेंज किया कि बीजेपी सरकार अभी चाहे तो मौजूदा नंबर्स के साथ 33 फीसदी आरक्षण लागू कर दे। सवाल ये है कि क्या इससे महिलाओं को उनका हक मिलेगा?