शह मात The Big Debate: जल-जंगल-जमीन..घमासान, क्या इसके पीछे सियासी प्लान? सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन करने की तैयारी में विपक्ष, क्या आदिवासियों को भड़का रही कांग्रेस?

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CG Politics News: केंद्र सरकार का दावा है कि केंद्र और राज्य दोनों सरकारों का फोकस अब तेजी से बस्तर विकास पर है।

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  • Publish Date - June 3, 2026 / 10:55 PM IST,
    Updated On - June 3, 2026 / 11:00 PM IST

CG Politics News/Image Credit: IBC24.in

HIGHLIGHTS
  • सरकार का दावा है कि केंद्र और राज्य दोनों सरकारों का फोकस अब तेजी से बस्तर विकास पर है।
  • 2031 तक बस्तर देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग होगा।
  • विपक्ष सरकार पर आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन को उद्योगों को बेचने का आरोप लगा रही है।

CG Politics News: रायपुर: 31 मार्च को बस्तर के नक्सलवाद से मुक्ति के बाद सरकार का दावा है कि केंद्र और राज्य दोनों सरकारों का फोकस अब तेजी से बस्तर विकास पर है। स्वयं देश के गृहमंत्री ये घोषणा कर चुके हैं कि, 2031 तक बस्तर देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग होगा, लेकिन विपक्ष सरकार पर आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन को उद्योगों को बेचने का आरोप लगा रही है। विरोध के लिए बाकायदा छत्तीसगढ़ आदिवासी कांग्रेस, प्रदेश के आदिवासियों को लामबंद करने में जुट गई है। बालोद के बाद हसदेव, सरगुजा और बस्तर में जंगल कटाई को लेकर कांग्रेस, (CG Politics News) अब डबल इंजन सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन करने की तैयारी में है। इसके लिए बाकायदा आदिवासी कांग्रेस सलाहकार परिषद के गठन हो चुका है। दावा है कि जल्द ही रायपुर में आदिवासी कांग्रेस सलाहकार परिषद की बैठक में आंदोलन की रणनीति बना ली जाएगी। पूर्व मंत्री और कांग्रेस के बड़े आदिवासी फेस अमरजीत भगत ने कहा कि जहां भी सरकार ने जंगल दांव पर लगाया है वहां आदिवासी आंदोलित है। सरकार उनकी आवाज दबाने उन्हें जेल में डाला जा रहा है।

CG Politics News: विपक्ष के आरोप और तैयारी पर पलटवार किया भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि कांग्रेसियों को शायद नक्सलवाद का खत्मा और बस्तर की शांति रास नहीं आ रही, वे माहौल बिगाड़ने भ्रम फैला रहे हैं।

बस्तर में शांति के लिए नक्सलवाद का खात्मा जरूरी था, जो अब हो चुका है। (CG Politics News)  अब बस्तर के युवाओं को अपना अधिकार और रोजगार चाहिए जिसके लिए सरकार ने पूरा प्लान बनाकर आगे बढ़ने का दावा किया है। ऐसे में विपक्ष की आदिवासी अंचल में सक्रियता के पीछे क्या उन्हें भड़काकर सियासी लाभ की मंशा है ? या फिर उनके आरोपों में सच्चाई है?

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