Chhattisgarh High Court: ‘पहले लागू होने के सबूत लाएं, फिर होगी सुनवाई’, याचिकाकर्ता को कोर्ट ने ​लगाई फटकार! जानिए क्या है पूरा मामला

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Chhattisgarh High Court: 'पहले लागू होने के सबूत लाएं, फिर होगी सुनवाई', याचिकाकर्ता को कोर्ट ने ​लगाई फटकार! जानिए क्या है पूरा मामला

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  • Publish Date - July 2, 2026 / 02:00 PM IST,
    Updated On - July 2, 2026 / 02:01 PM IST

Chhattisgarh High Court / Image Source : FILE

HIGHLIGHTS
  • स्कूलों में मंत्रोच्चार मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई
  • हाईकोर्ट ने याचिका की खारिज
  • बोला- आदेश लागू होने का कोई ठोस प्रमाण नहीं

बिलासपुर: Chhattisgarh High Court सरकारी स्कूलों में मंत्रोच्चार कराए जाने को लेकर आज छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Bilaspur High Court) में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य शासन के आदेश के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अभी तक ऐसा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो सके कि राज्य सरकार के आदेश को स्कूलों में लागू किया जा चुका है।

High Court News दरअसल, इस मामले को लेकर पूर्व वक्फ बोर्ड अध्यक्ष अब्दुल सलमान रिज़वी ने याचिका लगाई थी। याचिका में राज्य शासन के आदेश को संविधान का उल्लंघन बताते हुए निरस्त करने की मांग की गई थी।

याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता डॉ. अमीर खान के मुताबिक, कोर्ट ने कहा कि अभी यह साबित नहीं हुआ है कि स्कूलों में इस आदेश का पालन शुरू हो चुका है। ऐसे में फिलहाल राहत देने का आधार नहीं बनता।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि फिलहाल प्रदेश के किसी भी स्कूलों में मंत्रोच्चार की व्यवस्था लागू नहीं हुई है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि 12 जून को जारी सर्कुलर के बावजूद अभी तक कहीं भी इसकी शुरुआत नहीं हुई है।

सबूत के साथ दोबारा याचिका लगाने की छूट

हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ताा को छूट ​दी है कि भविष्य में किसी स्कूल में इस आदेश के पालन के ठोस साक्ष्य, जैसे वीडियो या अन्य दस्तावेज, सामने आते हैं तो वे उन्हें रिकॉर्ड के साथ नई याचिका दायर कर सकते हैं।

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याचिका किसने दायर की थी?

पूर्व वक्फ बोर्ड अध्यक्ष अब्दुल सलमान रिज़वी ने।

कोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की?

क्योंकि अभी तक आदेश लागू होने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला।

सरकार ने कोर्ट में क्या कहा?

कि प्रदेश के किसी भी स्कूल में मंत्रोच्चार की व्यवस्था लागू नहीं हुई है।