दिल्ली में एसआईआर प्रक्रिया के तहत मसौदा सूची में कट सकते हैं 47 लाख मतदाताओं के नाम

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दिल्ली में एसआईआर प्रक्रिया के तहत मसौदा सूची में कट सकते हैं 47 लाख मतदाताओं के नाम

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  • Publish Date - August 17, 2026 / 11:32 PM IST,
    Updated On - August 17, 2026 / 11:32 PM IST

नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद प्रकाशित होने वाली मसौदा सूची में 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 47 लाख से अधिक (करीब 33 प्रतिशत) के नाम कट सकते हैं।

बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा मुहैया कराए गए गणना प्रपत्र को भरकर वापस जमा करने की मियाद सोमवार को समाप्त हो गई। हालांकि, जिन मतदाताओं ने अपने प्रपत्र जमा नहीं किए हैं, उन्हें 24 अगस्त को मसौदा सूची प्रकाशित होने के बाद भी दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा।

दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर को प्रकाशित की जाएगी।

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय से जारी आंकड़ों के मुताबिक शहर के 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 97.47 लाख (67.18 प्रतिशत) ने अपने गणना प्रपत्र जमा करा दिये हैं और इन प्रपत्रों को सभी निर्वाचन क्षेत्रों में बीएलओ ने डिजिटल स्वरूप में परिवर्तित कर दिया है।

आंकड़ों के मुताबिक अल्पसंख्यक-बहुल कई निर्वाचन क्षेत्रों में जमा किए गए और सफलतापूर्वक डिजिटलीकृत किए गए प्रपत्रों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक रही।

उत्तर-पश्चिम दिल्ली के रोहिणी निर्वाचन क्षेत्र में 1,50,398 मतदाता हैं और यहां सबसे अधिक 83.43 प्रतिशत (1,25,478) प्रपत्रों का डिजिटलीकरण किया गया है जबकि 24,920 प्रपत्रों को ‘एकत्र नहीं किये गए’ के तौर पर चिह्नित किया गया।

प्रपत्रों के डिजिटलीकरण के मामले में प्रतिशत के हिसाब से शीर्ष पर रहने वाले अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में शकूरबस्ती (81.26 प्रतिशत), राजौरी गार्डन (79.14 प्रतिशत), मंगोलपुरी (78.76 प्रतिशत) और उत्तम नगर (77.76 प्रतिशत) शामिल हैं।

गणना प्रपत्रों के डिजिटलीकरण के मामले में सबसे फिसड्डी तुगलकाबाद (52.15 प्रतिशत) रहा। इसी निर्वाचन क्षेत्र में ‘एकत्र न किए जा सकने वाले’ प्रपत्रों की संख्या भी सबसे ज़्यादा (47.85 प्रतिशत) रही।

अल्पसंख्यक-बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में, चांदनी चौक में प्रपत्रों के डिजिटलीकरण की दर सबसे कम यानी 61.02 प्रतिशत रही।

सीईओ के आंकड़ों के अनुसार, जिन अल्पसंख्यक बहुल अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में गणना प्रपत्रों के डिजिटलीकरण का प्रतिशत अपेक्षाकृत अधिक रहा। इनमें मुस्तफ़ाबाद (71.91 प्रतिशत), मटिया महल (75.5 प्रतिशत), सीलमपुर (76.63 प्रतिशत), बाबरपुर (73 प्रतिशत) और बल्लीमारान (67.35 प्रतिशत) प्रमुख हैं।

एक निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम मसौदा मतदाता सूची में शामिल नहीं होंगे, उन्हें सीईओ कार्यालय से एएसडीडी (अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और नाम के दोहराव) श्रेणी के तहत गड़बड़ियों के लिए नोटिस मिलेंगे।

भाषा धीरज वैभव

वैभव