रायपुरः Chhattisgarh Jamboree Dispute छत्तीसगढ़ में जंबूरी पर छिड़ी सियासी लड़ाई अब हाईकोर्ट तक पहुंच चुकी है। कांग्रेस ये कहते हुए हमलावर है कि राज्य में सत्तापक्ष की ऐसी स्थिति पहली बार है। बीजेपी नेता इस पर मौन है। दरअसल, बालोद में 9 से 13 जनवरी को भारत स्काउट एन्ड गाइड के राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी आयोजन को लेकर सत्तापक्ष के नेताओं की लड़ाई अब हाई कोर्ट तक पहुंच चुकी है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने ‘जंबूरी‘ आयोजन को लेकर हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल करते हुए, उन्हें छग स्काउड-एंड-गाइड परिषद अध्यक्ष पद से हटाने के प्रस्ताव को असंवैधानिक बताया। याचिका में बृजमोहन ने दावा किया है कि पूरी कार्रवाई एकतरफा हो रही है। उन्हें, हटाने से पहले ‘ना तो कोई सूचना दी गई, ना सुनवाई का मौका‘।
Chhattisgarh Jamboree Dispute सांसद का आरोप है कि जंबूरी का आयोजन ‘नवा रायपुर से हटाकर गलत तरीके से बालोद में शिफ्ट किया गया। इसमें अनियमितता, अनदेखी और करप्शन की जांच होनी चाहिए। याचिका में बताया गया कि इसे लेकर 5 जनवरी को वैधानिक अध्यक्ष के तौर पर बृजमोहन ने परिषद की बैठक लेकर जंबूरी स्थगित करने का फैसला दिया. जिसे पलटते हुए आयोजन बालोद में कराया जा रहा है। कांग्रेस ने इन हालात पर करारा कटाक्ष किया और कहा कि पहली बार हो रहा है कि सरकार रहते हुए भाजपा के किसी वरिष्ठ नेता को कोर्ट जाना पड़ रहा है। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी ने कहा कि, सरकार को ईगो छोड़कर इसकी जांच करनी चाहिए। वहीं बीजेपी नेता इस मामले में बेहद सधी और गोल-मोल प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
कांग्रेस का मानना है कि बच्चों से जुड़े इस बड़े आयोजन में करप्शन आरोपों की गंभीर जांच होनी ही चाहिए। पहली बार कोई बीजेपी सांसद अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट गए हैं। जाहिर है ये स्थिति बीजेपी के लिए बड़ा चैलेंज बन चुकी है। सवाल है कि ये हालत क्यों बने? क्या वाकई कमीशन के लिए नेताओं की लड़ाई का खामियाजा जनता भुगत रही है?