CRUDE OIL/ image source: IBC24
Crude Oil Price News: नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झटका दे दिया है। सोमवार को शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया और ब्रेंट क्रूड 7% तक चढ़कर 82.37 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जो पिछले वर्ष जनवरी के बाद का उच्चतम स्तर है। सुबह 8:30 बजे यह 4.54% की बढ़त के साथ 76.18 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था। विश्लेषकों का कहना है कि ईरान और इजरायल के बीच टकराव, टैंकरों को नुकसान और समुद्री शिपमेंट बाधित होने से सप्लाई जोखिम बढ़ा है। बाजार में यह तेजी उस समय आई जब अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ट्रेडिंग पहली बार खुली। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद क्षेत्रीय तनाव तेजी से बढ़ गया है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति की अनिश्चितता और गहरी हो गई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान संकट कम से कम चार सप्ताह तक खिंच सकता है। इस बीच रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार मिसाइल हमलों में खाड़ी तट पर कम से कम तीन तेल टैंकर क्षतिग्रस्त हुए हैं और एक व्यक्ति की मौत हुई है। ईरान ने दावा किया है कि उसने होर्मुज की खाड़ी को बंद कर दिया है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% मार्ग है। यही समुद्री रास्ता कतर से एलएनजी निर्यात का प्रमुख मार्ग भी है, जिस पर भारत और चीन की ऊर्जा निर्भरता काफी अधिक है। सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण पिछले 24 घंटों में 200 से अधिक वाणिज्यिक जहाज खाड़ी क्षेत्र में लंगर डाले खड़े हैं, जिनमें तेल और एलएनजी टैंकर शामिल हैं।
ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई में टैंकरों को निशाना बनाए जाने से तेल आपूर्ति शृंखला पर गंभीर दबाव आ सकता है। विश्लेषकों ने अनुमान जताया है कि यदि संकट बढ़ा तो इस सप्ताह ब्रेंट 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। वहीं OPEC+ देशों ने अप्रैल से उत्पादन 2,06,000 बैरल प्रतिदिन बढ़ाने पर सहमति जताई है, ताकि बाजार को स्थिर किया जा सके। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज मार्ग बाधित रहा तो अतिरिक्त उत्पादन भी कीमतों को स्थिर रखने में पर्याप्त नहीं होगा। वैश्विक बाजारों के साथ भारत जैसे आयातक देशों पर भी इसका सीधा असर पड़ने की आशंका है, क्योंकि ऊंची तेल कीमतें ईंधन महंगाई और चालू खाते के दबाव को बढ़ा सकती हैं।