Asha Bhosle Passes Away: सुप्रसिद्ध गायिका आशा भोसले का निधन, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जताया शोक, कहा- आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा उनका जीवन

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सुप्रसिद्ध गायिका आशा भोसले का निधन, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जताया शोक, CM Sai Expressed Grief Demise of Asha Bhosle

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  • Publish Date - April 12, 2026 / 03:43 PM IST,
    Updated On - April 12, 2026 / 03:43 PM IST

रायपुर: Asha Bhosle Passes Away: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुप्रसिद्ध गायिका पद्म विभूषण आशा भोसले के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि आशा भोसले के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद एवं हृदयविदारक है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अपनी मधुर, विलक्षण और हृदयस्पर्शी आवाज़ से उन्होंने दशकों तक भारतीय संगीत को समृद्ध किया और करोड़ों हृदयों में अमिट स्थान बनाया। उनका यह अद्वितीय योगदान युगों-युगों तक अमर रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करता रहेगा। मुख्यमंत्री साय ने माँ वीणापाणि सरस्वती से प्रार्थना की है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने चरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिजनों और उनके असंख्य प्रशंसकों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

लेजेंड हैं आशा भोसले

Asha Bhosle Passes Away: आशा भोसले बॉलीवुड के लेजेंडरी सिंगर्स में से एक थी। उन्होंने अपनी आवाज का जादू बॉलीवुड फिल्मों में 1950 के दशक में चलाया था। उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर 40 और 50 के दशक की बड़ी गायिका थीं। मंगेशकर परिवार से आईं आशा भी अपनी बहन की ही तरह सुरीली आवाज वाली थीं। हालांकि उन्होंने बड़ी फिल्मों में अपनी आवाज देने से पहले कई लो बजट फिल्मों में गाना गाकर पहचान पाई। 1952 में आई फिल्म ‘संगदिल’ में उन्होंने गाने गाए थे। म्यूजिक कम्पोजर सज्जाद हुसैन की इस एल्बम ने आशा को फेम दिलाया। उस जमाने के जाने माने डायरेक्टर बिमल रॉय ने 1953 में आई फिल्म परिणीता में आशा भोसले को साइन किया था। इसके बाद राज कपूर ने उनकी अपनी 1954 की फिल्म ‘बूट पोलिश’ में काम दिया। लेजेंडरी म्यूजिक कम्पोजर ओ पी नय्यर के साथ आशा ने 1952 से लेकर 1956 तक कई गानों पर काम किया था। मगर 1957 में आई बी आर चोपड़ा की फिल्म ‘नया दौर’ के साथ आशा भोसले ने सफलता का असली स्वाद चखा। इस फिल्म के गाने भी नय्यर ने ही कम्पोज किए थे। मोहम्मद रफी के साथ आशा भोसले की जोड़ी उस जमाने में सुपरहिट थी। दोनों ने मिलकर ‘मांग के साथ तुम्हारा’, ‘साथी हाथ बढ़ाना’ और ‘उड़ें जब जब जुल्फें तेरी’ को गाया था। साहिर लुधियानवी के बोल और रफी संग आशा की आवाज का जादू सभी के सिर चढ़कर बोलता था। उन्होंने 60 के दशक की फिल्म ‘गुमराह’, ‘हमराज’, ‘आदमी और इंसान’ संग कई और में अपनी आवाज दी। 1966 में उन्होंने आर डी बर्मन के साथ फिल्म ‘तीसरी मंजिल’ के लिए गाने गाए थे, जिन्हें खूब सराहा गया।

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