Corruption in MP/Image Credit: IBC24.in
Corruption in MP: भोपाल: मध्यप्रदेश में तीन ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने सरकार के जीरो टॉलरेंस के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ 23 करोड़ रुपए का 86 हजार क्विंटल सरकारी गेहूं रिकॉर्ड से गायब हो जाता है। दूसरी तरफ गरीबों के पोषण के लिए भेजा गया फोर्टिफाइड चावल एथेनॉल प्लांट की जगह राइस मिल में पहुंच जाता है और तीसरी तरफ एक सरकारी इंजीनियर कैमरे पर दावा करता है कि बिना कमीशन के कोई सरकारी काम ही नहीं होता।
जाहिर तौर पर संविदा इंजीनियर के दावे ने पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया। आरोप है कि, ग्राम पंचायत से लेकर भोपाल तक कमीशन का खेल चलता है। (Corruption in MP) हालांकि सत्तापक्ष इसे बेबुनियाद बता रही है। जबकि विपक्ष पूछ रहा है अगर आरोप झूठे हैं तो फिर खुली और निष्पक्ष जांच से डर किस बात का?
Corruption in MP: इधर खंडवा में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भर्ती में अनियमितता और फर्जीवाड़े के आरोप ने भी प्रदेश में करप्शन और कमीशन के खेल को जगजाहिर कर दिया है। कुल मिलाकर ये सिर्फ चंद घटनाएं हैं जो सरकारी सिस्टम में जड़ें जमा चुके भ्रष्टाचार की कहानी बयां करती है और सवाल भी पूछतीहै कि ये सिर्फ लापरवाही है या करप्शन और कमीशन का खुला खेल,जिसका हिस्सा ऊपर से नीचे तक जा रहा है।
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