“जोहार हबीब” प्रतिबद्ध रंगकर्मी, सामाजिक कार्यकर्ता व गांधीवादी विचारक : प्रसन्ना का प्रेरक व्यक्तित्व
Johar Ahbib प्रतिबद्ध रंगकर्मी, सामाजिक कार्यकर्ता व गांधीवादी विचारक : प्रसन्ना का प्रेरक व्यक्तित्व
रायपुर। Johar Ahbib : 4 सितंबर को प्रेस क्लब सभागार में आयोजित “जोहार हबीब” में देश के प्रख्यात रंगकर्मी, गांधीवादी विचारक व सामाजिक कार्यकर्ता प्रसन्ना पहली बार शहर आ रहे हैं। संगीत,नाटक अकादमी अवार्ड के अलावा कर्नाटक के राज्योत्सव अवार्ड, कर्नाटक के नाटक अकादमी अवार्ड, NSD के ब.व. कारंथ स्मृति सम्मान, कोलकाता के नंदीग्राम अवार्ड आदि अनेक सम्मानों से नवाजे गए।
प्रसन्ना ने निर्देशन में विशेषज्ञता के साथ एनएसडी से डिप्लोमा किया है। उन्होंने एनएसडी के विजिटिंग प्रोफेसर तथा रंगायन मैसूर के निर्देशक के रूप में भी कार्य किया है। देसी व चरक के संस्थापक ट्रस्टी प्रसन्ना ने थिएटर और सस्टेनेबल लिविंग के क्षेत्र में अनेक किताबें लिखी हैं। उनकी कुछ रचनाओं का हिंदी, अंग्रेजी व विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद व प्रदर्शन हुआ है।
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Johar Ahbib : ‘भारतीय अभिनेता के लिए सबक’ पुस्तक हाल ही में कन्नड भाषा में प्रकाशित हुई है। उन्होंने 2013-14 में हाथकरघा सत्याग्रह का नेतृत्व किया जिसमें कर्नाटक और आंध्रप्रदेश के हजारों बुनकर शामिल हुए। सरकार से बुनकरों की आजीविका की रक्षा के लिए 1985 के हाथकरघा अधिनियम को लागू करने की मांग की। वह कवि-काव्य ट्रस्ट, चरक महिला बहुउद्देशीय औद्योगिक सहकारी समिति, ओन्टिडानी प्रकाशन और देसी ट्रस्ट के संस्थापक भी हैं। 1975 में आपातकाल के दौरान देश की राजनीतिक स्थिति से प्रेरित होकर कुछ समान विचारधारा वालों के साथ ‘समुदाया’ नामक थिएटर ग्रुप प्रारंभ किया।
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इस ग्रुप ने पूरे कर्नाटक राज्य की यात्रा की और कई विचारोत्तेजक नाटकों का प्रदर्शन किया। 1978 के चुनाव के दौरान लोगों के मस्तिष्क पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ा।

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