‘संविधान हत्या दिवस’ लोकतांत्रिक इतिहास के काले अध्याय की याद दिलाएगा : साय

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'संविधान हत्या दिवस' लोकतांत्रिक इतिहास के काले अध्याय की याद दिलाएगा : साय

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  • Publish Date - June 25, 2026 / 02:24 PM IST,
    Updated On - June 25, 2026 / 02:24 PM IST

रायपुर, 25 जून (भाषा) छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बृहस्पतिवार को कहा कि 1975 की आपातकाल की याद में ‘संविधान हत्या दिवस’ मनाना युवा पीढ़ी को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के उस काले अध्याय की याद दिलाएगा जिसे कभी नहीं भुलाया जाना चाहिए।

देश में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 के बीच, संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल लागू किया गया था।

केंद्र सरकार इस दिन को ‘संविधान हत्या दिवस’ के तौर पर मना रही है।

साय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ”25 जून 1975 – भारतीय लोकतंत्र का वह काला दिवस, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार के सत्ता के अहंकार ने संविधान की आत्मा को कुचलकर पूरे देश पर आपातकाल थोप दिया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आपातकाल के दौरान मीसा जैसे दमनकारी कानूनों के तहत हजारों लोकतंत्र सेनानियों, पत्रकारों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को जेलों में डाल दिया गया। उनकी आवाज दबाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन उनका साहस अटूट रहा।”

मुख्यमंत्री ने लिखा, ”प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा 25 जून को “संविधान हत्या दिवस” घोषित करना उन सभी शहीदों और सेनानियों को सच्ची श्रद्धांजलि है। यह नई पीढ़ी को उस काले अध्याय की याद दिलाएगा जिसे हम कभी भूल नहीं सकते।”

उन्होंने लिखा है, ”छत्तीसगढ़ में हमारी सरकार ने लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान को पुनर्स्थापित किया है। छत्तीसगढ़ की पूर्व कांग्रेस सरकार द्वारा बंद की गई सम्मान निधि को बहाल कर बकाया राशि का भुगतान किया गया और लोकतंत्र सेनानी सम्मान विधेयक-2025 पारित कर उनके सम्मान को कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आइए, हम सब लोकतंत्र सेनानियों को सादर नमन करते हुए संविधान की रक्षा का संकल्प दोहराएं। वंदे मातरम्।”

भाषा संजीव मनीषा रंजन

रंजन