Dhamtari Dussehra News: छत्तीसगढ़ के इस गांव में नहीं होता रावण दहन, होली भी जलती है सरहद के बाहर, जानिए क्यों

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Dhamtari Dussehra News: छत्तीसगढ़ के इस गांव में नहीं होता रावण दहन, होली भी जलती है सरहद के बाहर, जानिए क्यों

  • Reported By: Devendra Mishra

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  • Publish Date - October 2, 2025 / 04:09 PM IST,
    Updated On - October 2, 2025 / 04:09 PM IST

Dhamtari Dussehra News/Image Source: IBC24

HIGHLIGHTS
  • जहां दशहरे पर नहीं जलता रावण
  • धमतरी के इस गांव में आग लगाना है वर्जित
  • धमतरी के इस गांव में आग जलाना है अशुभ

धमतरी: Dhamtari Dussehra News:  धमतरी जिले का तेलिनसत्ती गांव अपनी अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है… वक्त ज़रूर बदला है लेकिन इस गांव के दस्तूर आज भी जस के तस कायम हैं। जहां पूरे देश में दशहरे पर रावण दहन होता है वहीं यहां दशहरे की खुशियाँ बिना रावण दहन के ही मनाई जाती हैं। गांववालों का मानना है कि आग जलाना उनके लिए अशुभ साबित हो सकता है।

धमतरी से कुछ ही दूरी पर बसे तेलिनसत्ती गांव की पहचान इसकी सदियों पुरानी परंपरा है। इस गांव में दशहरे पर रावण दहन नहीं किया जाता। यही नहीं होली का दहन और यहां तक कि चिता दाह तक गांव की सीमा के भीतर नहीं होता। हर बार आग से जुड़ी रस्में गांव की सरहद के बाहर निभाई जाती हैं।

Dhamtari Dussehra News:  गांव के बुज़ुर्गों का कहना है कि सदियों पहले इस गांव में एक महिला ने अपने पति की चिता पर सती हो गई थी। तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि गांव के भीतर किसी भी मौके पर आग नहीं जलाई जाएगी। लोगों का विश्वास है कि ऐसा करने से गांव पर आफ़त आ सकती है।

बदलते वक्त में भी यह दस्तूर कायम है। युवा वर्ग भी इसे अंधविश्वास नहीं, बल्कि आस्था से जोड़कर देखता है। उनका कहना है कि यह परंपरा ही गांव की पहचान है और इसे आगे बढ़ाना उनकी जिम्मेदारी है। तेलिनसत्ती गांव का यह अनोखा दस्तूर ही इसे बाकी गांवों से अलग बनाता है। दशहरे पर भले ही यहां रावण दहन नहीं होता, लेकिन उत्साह, उमंग और त्योहार की रौनक किसी भी गांव से कम नहीं होती।

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तेलिनसत्ती गांव में दशहरा कैसे मनाया जाता है?

तेलिनसत्ती गांव में दशहरा बिना रावण दहन के मनाया जाता है, लेकिन उत्सव पूरी श्रद्धा और उत्साह से होता है।

तेलिनसत्ती गांव में रावण दहन क्यों नहीं होता?

गांववालों का मानना है कि गांव के भीतर आग जलाना अशुभ हो सकता है। यह परंपरा एक सती प्रथा की घटना के बाद शुरू हुई थी।

क्या तेलिनसत्ती गांव में होली दहन भी नहीं होता?

जी हां, होली दहन भी गांव की सीमा के बाहर ही किया जाता है। गांव के अंदर कोई आग से जुड़ी रस्म नहीं होती।

क्या तेलिनसत्ती की यह परंपरा आज भी निभाई जाती है?

हां, बदलते वक्त में भी यह परंपरा जस की तस कायम है, और युवा वर्ग भी इसे पूरी श्रद्धा से निभाता है।

तेलिनसत्ती गांव किस जिले में स्थित है?

तेलिनसत्ती गांव छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्थित है, जो अपनी सांस्कृतिक पहचान के लिए प्रसिद्ध है।