उत्तर प्रदेश: सर्वोदय विद्यालयों और छात्रावासों में हर पेड़ की होगी डिजिटल पहचान

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उत्तर प्रदेश: सर्वोदय विद्यालयों और छात्रावासों में हर पेड़ की होगी डिजिटल पहचान

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  • Publish Date - June 14, 2026 / 07:45 PM IST,
    Updated On - June 14, 2026 / 07:45 PM IST

लखनऊ, 14 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण विभाग ने एक अभिनव पहल के तहत अपने सभी जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों, आश्रम पद्धति विद्यालयों, छात्रावासों और अन्य संस्थानों में मौजूद पेड़ों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए वृक्ष परिसंपत्ति प्रबंधन व्यवस्था लागू करने का निर्णय किया है।

यहां जारी एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस व्यवस्था के तहत प्रत्येक पेड़ को एक अनूठी पहचान संख्या प्रदान की जाएगी जिससे उसकी निगरानी, संरक्षण और प्रबंधन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। इस संबंध में समाज कल्याण विभाग के अनुराग यादव ने आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

बयान के अनुसार नयी व्यवस्था के अंतर्गत विभागीय संस्थानों में मौजूद सभी पेड़ों का व्यापक सर्वेक्षण कराया जाएगा। प्रत्येक पेड़ को एक विशेष पहचान संख्या दी जाएगी और उसकी प्रजाति, स्थान, अनुमानित आयु तथा वर्तमान स्थिति का पूरा विवरण वृक्ष परिसंपत्ति पंजिका में दर्ज किया जाएगा।

बयान में कहा गया है कि इसके साथ ही सभी पेड़ों की फोटो लेकर उनका डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार किया जाएगा, जिससे समय-समय पर उनकी स्थिति का आकलन करने और आवश्यक संरक्षण उपाय करने में सुविधा मिलेगी।

समाज कल्याण विभाग ने स्पष्ट किया है कि संस्थानों में मौजूद सभी पेड़ों को अब परिसंपत्ति के रूप में दर्ज किया जाएगा और किसी भी पेड़ की कटाई अथवा बड़े स्तर पर छंटाई बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के नहीं की जा सकेगी।

विभाग के अनुसार प्रत्येक वर्ष इन पेड़ों का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा, ताकि उनकी सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि पेड़ हमारी अमूल्य प्राकृतिक धरोहर हैं और उनका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप दिया जा रहा है और इस कड़ी में विभागीय संस्थानों में वृक्ष परिसंपत्ति प्रबंधन व्यवस्था लागू की जा रही है।

उन्होंने कहा कि इससे न केवल पेड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि विद्यार्थियों और समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।

भाषा राजेंद्र जोहेब

जोहेब