‘धान के कटोरे’ पर दुश्मन की नजर, फसल बर्बाद कर रहा ‘पेनिकल माइट’

धान के कटोरे' पर दुश्मन की नजर, फसल बर्बाद कर रहा 'पेनिकल माइट'! Farmers Upset due to Panicle mite damage paddy crop

Modified Date: November 29, 2022 / 09:00 pm IST
Published Date: October 4, 2021 11:58 pm IST

रायपुर: मानसून के बाद छ्त्तीसगढ़ पुलिस ने नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन विंटर एक्टिवेट कर दिया है। पुलिस ने अगले 6 महीने के नक्सल ऑपरेशन की रणनीति तैयार की है। बस्तर IG सुंदरराज पी ने पिछले दिनों बस्तर में SP और फोर्स के अफसरों की बैठक लेकर नक्सल इलाकों में पुलिस के संरक्षण में हो रहे सड़क निर्माण और विकास कार्यों में तेजी लाने के भी निर्देश दिए है। आपको बता दें कि प्रदेश सरकार नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सल ऑपरेशन के साथ-साथ आदिवासियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए इलाके में विकास काम भी कर रही है। इसी कड़ी में दोरनापाल से जगरगुंडा के बीच 56 किलोमीटर, बासागुड़ा से जगरगुंडा के बीच 40 किलोमीटर,पामेड़ से उसूर के बीच 32 किलोमीटर और पल्ली बारसूर करीब 40 किलोमीटर सड़क का निर्माण पुलिस संरक्षण में किया जा रहा है।

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छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। दूनिया भर में प्रदेश की अलग पहचान है, लेकिन इन दिनों धान की फसल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। खुली आंखों से नजर नहीं आने वाला एक दुश्मन घातक साबित हो रहा है। किसानों के सपनों पर पानी फेर रहा है। पहली नजर में मकड़ी की तरह दिखाई देने वाला ये कीट इन दिनों खरोरा में धान की फसल को बर्बाद कर रहा है। प्रदेश के कृषि वैज्ञानिकों को भी चकमा दे रहा है। खरोरा के नहरडीह गांव में धान की फसलों को ये कीट नुकसान पहुंचा रहा है। फसलों के बर्बाद होने की खबर जैसे ही रायपुर कृषि वैज्ञानिकों को लगी। तत्काल गांव पहुंचकर फसलों की जांच की, तब खुलासा हुआ कि पेनिकल माइट नाम का कीट किसानों की मेहनत पर पानी फेर रहा है।

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धान की जो फसल इस कीट की चपेट में आ चुकी है, उसे बचाने का उपाय अब वैज्ञानिकों के पास भी नहीं है। उनका मानना है कि समय रहते बीमारी की पहचान हो जाती तो फसलों को बचाया जा सकता था। घुन के लक्षणों के लिए खेत की लगातार निगरानी करनी होगी। फसल काटने के बाद दो सप्ताह तक खेत को खाली छोड़ दें। घुन पर नियंत्रण के लिए कुछ साल के अंतर में फसलों में बदलाव करना चाहिए। कीटनाशक दवाओं का ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। बीमारियों की रोकथाम के लिए जैविक उपचारों का ज्यादा फोकस करना होगा। दवाइयों के छिड़काव से पहले खेत को पानी से लबालब भर दें। ताकि घुन पौधे के ऊपर चढ़ जाएं, जिससे उपचार का प्रभाव बढ़ जाता है। हालांकि जिन किसानों की फसलें इस बार बर्बाद हो चुकी है। अधिकारी उन्हें मुआवजा दिलाने का भरोसा दे रहे हैं।

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जिन किसानों की फसलें बर्बाद हो चुकी है वो सरकार से राहत की आस तो कर ही रहे हैं। वहीं कृषि वैज्ञानिकों को भी अलर्ट रहना होगा, क्योंकि छत्तीसगढ़ की पहचान धान है और ये कीट छिपकर इसी पहचान पर हमला कर रहा है।

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