Reported By: Rajesh Raj
,रायपुरः Forest Department Transfer System छत्तीसगढ़ के वन विभाग में वर्दीधारी फ्रंट लाइन स्टाफ कर्मचारियों को ट्रांसफर करने का सिस्टम बदलने जा रहा है। अब तक सबसे निचले स्तर के कैडर वनरक्षक से लेकर उपर के पीसीसीएफ स्तर तक के अधिकारियों का ट्रांसफर शासन स्तर पर होता था, लेकिन वन मुख्यालय इस सिस्टम को बदलना चाहता है। वनरक्षक से लेकर वनक्षेत्रपाल तक का ट्रांसफर डीएफओ और सीसीएफ को देने की तैयारी है, लेकिन इसके खिलाफ विभाग के कर्मचारियों ने ही मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारी संघ का आरोप है कि भ्रष्टाचार को दबाने के लिए ट्रांसफर का ये सिस्टम बदला जा रहा है जो उन्हें मंजूर नहीं।
छत्तीसगढ़ वन मुख्यालय की ट्रांसफर अधिकार में बदलाव की कोशिश ने विभाग के 12 हजार से ज्यादा कर्मचारियों को भड़का दिया है। अब तक वन अमले के सबसे निचले पायदान पर काम करने वाले वनरक्षक से लेकर वनपाल, उप वनक्षेत्रपाल और वन क्षेत्रपाल का ट्रांसफर भी शासन स्तर पर होता आया है, लेकिन वन मुख्यालय अब इनके ट्रांसफर का अधिकार फॉरेस्ट डिस्ट्रिक के मुखिया डीएफओ और उनके उपर के अधिकारी सीसीएफ को देना चाह रहा है। विभाग के शीर्ष अधिकारियों का तर्क है कि इससे मैदानी अमले की कार्यक्षमता बढ़ेगी। मैदानी स्तर पर वन विभाग की प्लानिंग एवं एक्जिक्यूशन में मजबूती आएगी। ठीक वैसे ही जैसे पुलिस विभाग में कांस्टेबल से लेकर एएसआई तक के ट्रांसफर का अधिकार एसपी और आईजी के हाथ होता है। चूंकि वन पुलिस बल का काम भी पुलिस की तरह ही वन्य जीव और वन संपत्तियों की रक्षा करना और अपराधियों पर नकेल कसना है, इसलिए ट्रांसफर सिस्टम भी पुलिस बल की तरह हो, लेकिन वन विभाग की यह पहल कर्मचारियों को रास नहीं आ रही है। उन्होने इसे लेकर पीसीसीएफ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
वन विभाग के कर्मचारी संघ का आरोप है कि मैदानी क्षेत्र के भ्रष्टाचार को दबाने और छिपाने के लिए ट्रांसफर सिस्टम को बदला जा रहा है। अब तक जिलों में कई बड़े भ्रष्टाचार बड़े अधिकारियों द्वारा किए गए हैं। कई बार इसका भंडाफोड भी नीचले स्तर के अधिकारियों ने किए। ऐसे में अगर ट्रासफर का अधिकार डीएफओ या सीसीएफ को दिया गया तो गलत काम के खिलाफ आवाज उठाने वाले नीचले कर्मचारियों को टार्गेट किया जाएगा और उन्हें मनमानी तरह सेट्रासंफर किया जाएगा। दरअसल, वर्दीधारी फ्रंट लाइन स्टाफ के ट्रासंफर करने के अधिकार में बदलाव की एक कोशिश इससे पहले साल 2019 में भी की गई थी, लेकिन तब समान्य प्रशासन विभाग तत्कालीन पीसीसीएफ के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया था। अब एक बार फिर से यह पहल की गई है।