त्योहारों के मजहबी रंग..अब तो हर बात पर जंग! क्या साफ-सफाई को सांप्रदायिक चश्मे से देख रही BJP?
त्योहारों के मजहबी रंग..अब तो हर बात पर जंग! क्या साफ सफाई को सांप्रदायिक चश्मे से देख रही BJP? Is BJP looking at cleanliness through communal lens?
रायपुर। रायपुर नगर निगम ईद के मद्देनजर विशेष सफाई अभियान चलाएगा। निगम कमिश्नर मयंक चतुर्वेदी ने सभी जोन कमिश्नरों को इसका आदेश जारी किया है। साफ-सफाई के इस आदेश पर नई सियासी बहस छिड़ गई है। भाजपा ने बहुसंख्यकों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया तो कांग्रेस ने 23 के चुनाव में ठीक से सफाया होने का तंज कसा। सवाल है कि ईद पर विशेष सफाई के आदेश पर भाजपा को ऐतराज क्यों है, क्या साफ-सफाई को सांप्रदायिक चश्मे से देख रही BJP, क्या वाकई प्रदेश में बहुसंख्यकों के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है और क्या अब पर्व-त्योहार भी राजनीति का जरिया बन गए हैं।
छत्तीसगढ़ में तीज-त्योहार भी राजनीतिक का जरिया बनते जा रहे हैं। ईद के मौके पर रायपुर नगर निगम ने मुस्लिम बहुल वार्डों में विशेष सफाई के आदेश जारी किए, जिस पर सियासी रंग चढ़ गया। इस आदेश पर भाजपा ने ट्वीट किया कि ‘ये विशेष सफाई का आदेश काश रामनवमी, नवरात्रि और दिवाली पर भी मिलता।’ इसके साथ ही ये आरोप भी लगाया कि भूपेश सरकार हिंदुओं के साथ सौतेला व्यवहार करती है। भाजपा के ट्वीट पर कांग्रेस ने भी करारा पलटवार किया। लिखा कि ‘वैसे तो छत्तीसगढ़ की जनता ने एक विशेष सफाई अभियान 2018 में चलाया था, जिससे काफी राहत मिली जनता को… खैर, शांति समिति की बैठक में हर त्योहार से पहले ऐसे फैसले लिए जाते हैं। सांप्रदायिक चश्मे से सिर्फ ईद दिखती है, होली नहीं..2023 में ठीक से सफाई होगी। डोन्ट वरी।
हालांकि ये पहली बार नहीं है, इससे पहले भी सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही ऐसे मुद्दों पर एक-दूसरे को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश करते रहे हैं। लेकिन सवाल है कि गंगा-जमुनी तहजीब वाले छत्तीसगढ़ में तीज-त्योहारों पर राजनीति क्यों हो रही है? भेदभाव और तुष्टिकरण के आरोप-प्रत्यारोप के सियासी मायने क्या हैं? क्या चुनावी साल में वोट बैंक के लिए नेता प्रोएक्टिव हो गए हैं?
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