सियासी जाल में शराबबंदी…राजनीतिक मुद्दा बनकर रह जाएगा शराब?

Modified Date: November 29, 2022 / 08:45 pm IST
Published Date: July 23, 2021 11:32 pm IST

रायपुर: धान के कटोरे में इन दिनों शराब का मुद्दा उबल रहा है। प्रदेश में अवैध शराब की बिक्री की खबरों के बहाने बीजेपी ने एक बार फिर शराबबंदी के मुद्दे को हवा दी है। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने आरोप लगाया कि दूसरे राज्यों की अवैध शराब को राज्य में खपाया जा रहा है, उन्होंने सीएम भूपेश बघेल को पत्र लिखकर मांग की है कि वो शराबबंदी पर अपना वादा पूरा करे। बीजेपी के आरोपों पर मंत्री रविंद्र चौबे ने जवाब दिया कि अगर बीजेपी को शराबबंदी की इतनी ही चिंता है, तो इसके लिए बनी कमेटी में शामिल क्यों नहीं होती? शराबबंदी को लेकर दोनों पक्षों में जारी गतिरोध के बीच बड़ा सवाल ये है कि क्या राजनीतिक मुद्दा बनकर रह जाएगा शराब?

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बीते 16 जुलाई की ये तस्वीरें बलौदाबाजार के सिमगा की है, जहां एक सरकारी शराब दुकान में बगैर परमिट के 400 पेटी शराब उतरी थी। इसके बाद काफी हंगामा मचा और फिर बीजेपी विधायक शिवरतन शर्मा की हस्तक्षेप के बाद सिमगा पुलिस ने अवैध शराब की जब्ती कर ली। लेकिन इस घटना को लेकर विपक्ष एक बार फिर सरकार पर हमलावर है। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने आरोप लगाया है कि जब्ती और पंचनामा के बाद शराब की पेटियों को गाड़ी सहित गायब कर दिया गया। कौशिक ने आरोप लगाया कि दूसरे राज्यों से आ रही शराब की वजह से सरकार को राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। उन्होंने सिमगा थाने से गायब हुई शराब के मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

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धरमलाल कौशिक ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखकर एक बार फिर शराबबंदी की मांग की है, उन्होंने कहा कि प्रदेश को नशा मुक्त बनाने के लिए सामाजिक संगठन भी पूर्ण शराबबंदी की मांग कर कर रहे हैं। इसके बाद भी सरकार कुछ नहीं कर रही। शराबबंदी का वादा पूरा नहीं करने पर बीजेपी ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। बीजेपी युवा मोर्चा और महिला मोर्चा तो इसे लेकर लगातार आंदोलन चला रही है। चिरमिरी में भी बीते तीन दिन से बीजेपी शराब दुकान हटाने को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही है।

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दरअसल राज्य में शराब बैन के संकल्प के साथ ही सरकार में आई कांग्रेस ढाई साल गुजरने के बाद भी इस पर कोई फैसला नहीं ले पाई है। हालांकि सत्ता पक्ष का दावा है कि बीजेपी केवल शराबबंदी के मुद्दे पर सियासत करती है। अगर बीजेपी नेताओं को वाकई शराबबंदी की चिंता है तो सरकार द्वारा बनाई गई कमेटी में शामिल हो और सुझाव दें।

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ये पहला मौका नहीं है जब प्रदेश में अवैध शराब पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हो। आबकारी मंत्री कवासी लखमा छत्तीसगढ़ में अवैध शराब की तस्करी को बीजेपी की चाल बता चुके हैं, जिसे लेकर भी काफी बवाल मचा था। सिमगा मामले के बहाने बीजेपी एक बार फिर आक्रामक अंदाज में सरकार को घेरने में जुट गई है। आगामी 26 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में भी शराब का मुद्दा उठना तय है।

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