बीजापुर, 27 जुलाई (भाषा) कभी माओवादियों का गढ़ रहे बीजापुर जिले के नौ विद्यार्थियों ने स्थानीय प्रशासन द्वारा संचालित कोचिंग केंद्र में पढ़ाई कर राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) 2026 की पुनर्परीक्षा उत्तीर्ण की है, जो जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि सफल विद्यार्थियों में अधिकतर किसान या दिहाड़ी मजदूर के परिवारों से आते हैं। ये सभी जिला प्रशासन की उस कोचिंग योजना का हिस्सा थे, जिसका उद्देश्य जिले के पिछड़े क्षेत्रों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए तैयार करना है।
मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए पात्र ये सभी विद्यार्थी जिला प्रशासन द्वारा संचालित आवासीय कोचिंग केंद्र ‘छू लो आसमान’ के छात्र थे, जहां स्थानीय विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है।
अधिकारियों का कहना है कि यह सफलता बीजापुर की बदलती तस्वीर को दर्शाती है, जहां माओवादी हिंसा में कमी और विकास कार्यों के चलते शिक्षा के क्षेत्र में भी सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं।
बीजापुर के कलेक्टर विश्वदीप ने कहा, “हमारे जिले के नौ विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की है। इन सभी ने जिला प्रशासन द्वारा संचालित ‘छू लो आसमान’ कोचिंग केंद्र में पढ़ाई की। यह हमारे जिले के लिए बड़ी उपलब्धि है।”
जिला शिक्षा अधिकारी राजेश पांडे ने बताया कि 21 जून को आयोजित नीट पुनर्परीक्षा में 25 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया था। इनमें 12वीं जीवविज्ञान वर्ग के 21 नियमित विद्यार्थी और दोबारा परीक्षा देने वाले चार अभ्यर्थी शामिल थे।
परीक्षा का परिणाम 16 जुलाई को घोषित किया गया था।
सफल अभ्यर्थियों में पांच अनुसूचित जनजाति (एसटी), तीन अनुसूचित जाति (एससी) और एक अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से है। अधिकतर विद्यार्थियों के माता-पिता किसान या दिहाड़ी मजदूर हैं।
कोचिंग केंद्र के विद्यार्थियों में सिद्धार्थ दुर्गम ने 720 में से 482 अंक प्राप्त कर सर्वोच्च स्थान हासिल किया।
अन्य सफल अभ्यर्थियों में चंपा पोयामी (352), अरुण तोडेम (339), तेजेश दुर्गम (294), समीर लकड़ा (241), कुरसम जितेंद्र (240), देवीद दुर्गम (213), हुमेश्वर देवांगन (213) और गणेश कुमार वच्छम (179) शामिल हैं।
संकनपल्ली गांव की निवासी चंपा पोयामी ने अपनी सफलता का श्रेय शिक्षकों और माता-पिता को दिया।
उन्होंने कहा, “हमारे शिक्षकों ने हर कदम पर हमारा मार्गदर्शन किया और हमने उसी के अनुसार पढ़ाई की। विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर मेहनत करनी चाहिए। नीट में सफलता का श्रेय मैं अपने शिक्षकों और माता-पिता दोनों को देना चाहती हूं।”
भाषा
राखी सुरेश
सुरेश