रायपुरः Raipur Literature Festival: डिजिटल युग ने मानव जीवन को जितना सुविधाजनक बनाया है, उतना ही उसने हमारी पढ़ने-लिखने की आदतों को भी प्रभावित किया है। आज सूचना एक क्लिक पर उपलब्ध है, लेकिन गहन पठन, मनन और साहित्यिक संवेदना धीरे-धीरे कमजोर होती दिखाई दे रही है। साहित्य, जो कभी समाज की चेतना और आत्मा माना जाता था, डिजिटल शोर में कहीं पीछे छूटता जा रहा है। वहीं दूसरी ओर आज के दौर में साहित्यकारों के साथ-साथ अन्य लोगों को बेहतर मंच नहीं मिल पा रहा है। इन्हीं सबको ध्यान में रखकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव की अगुवाई छत्तीसगढ़ सरकार रायपुर में साहित्य उत्सव का आयोजन कर रही है। प्रदेश में यह पहला मौका है जब छत्तीसगढ़ की साहित्यिक पृष्ठभूमि को विश्वपटल पर ले जाने के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास किया जा रहा हो।
Raipur Literature Festival चूंकि छत्तीसगढ़ अपनी सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत के लिए सदैव जाना जाता रहा है। यहाँ की मिट्टी में लोकगीत, लोककथाएँ, नाट्य परंपरा और जनभाषाओं की गहरी जड़ें हैं। छत्तीसगढ़ की साहित्यिक पृष्ठभूमि अत्यंत समृद्ध रही है। पं. सुंदरलाल शर्मा, गजानन माधव मुक्तिबोध, विनोद कुमार शुक्ल, हरि ठाकुर जैसे साहित्यकारों ने हिंदी साहित्य को नई दिशा दी। लंबे समय से ये महसूस की जा रही थी कि यहां के साहित्यकारों की कृतियों को वैश्विक पटल पर स्थापित की जाए। राज्य गठन के बाद की समयावधि के देखें तो पूर्व की सरकार की केवल योजनाओं में फोकस की, लेकिन साय सरकार आने के बाद यहां के साहित्य और सांस्कृतिक धरोहरों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया। कई बड़े आयोजनों के जरिए इसे नई मंच देने की कोशिश हुई। वर्तमान साय सरकार द्वारा साहित्य उत्सव का आयोजन इसी दिशा में एक सार्थक कदम है। सरकार का उद्देश्य केवल साहित्यिक आयोजन करना नहीं, बल्कि स्थानीय भाषाओं, लोकसाहित्य और युवा रचनाकारों को प्रोत्साहित करना भी है।
Vishnu Ka Sushasan: छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपरा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करने के उद्देश्य से 23, 24 एवं 25 जनवरी 2026 को अटल नगर, नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का भव्य आयोजन किया जा रहा है। तीन दिवसीय यह उत्सव साहित्य, संस्कृति और विचार-विमर्श का एक सशक्त मंच बनेगा, जिसमें देश-प्रदेश के ख्यातिप्राप्त लेखक, कवि, विचारक, बुद्धिजीवी और साहित्य प्रेमी बड़ी संख्या में सहभागिता करेंगे। रायपुर साहित्य उत्सव में देश एवं प्रदेश के लगभग 120 ख्यातिप्राप्त साहित्यकार, बुद्धिजीवी और रचनाकार सहभागिता करेंगे। तीन दिनों में कुल 42 सत्रों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें समकालीन सामाजिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक विषयों पर गहन विमर्श होगा। उत्सव में लेखिका एवं पत्रकार शिखा वार्ष्णेय, लेखक एवं कवि कमलेश कमल, डॉ. गोपाल कमल तथा नवगीत के शिखर पुरुष डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर करेंगे। उद्घाटन दिवस की सांस्कृतिक संध्या में सायं 7 बजे रंगमंच के प्रतिष्ठित कलाकार एवं पद्म से सम्मानित मनोज जोशी द्वारा बहुचर्चित नाटक ‘चाणक्य’ का मंचन किया जाएगा। अपने सशक्त और जीवंत अभिनय के माध्यम से जोशी आचार्य चाणक्य की भूमिका में दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। यह नाटक समकालीन समस्याओं और उनके समाधान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हुए भारतीय साहित्य और संस्कृति की गहराइयों को समझने का अवसर प्रदान करेगा।
छत्तीसगढ़ की लोकभाषाओं और लोकसाहित्य को विशेष महत्व दिया जाना इस आयोजन की एक बड़ी विशेषता है। छत्तीसगढ़ी, सरगुजिया और अन्य क्षेत्रीय बोलियों में रचे गए साहित्य को राष्ट्रीय मंच प्रदान कर साय सरकार ने स्थानीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक सराहनीय कदम उठाया है। इससे न केवल स्थानीय रचनाकारों को पहचान मिलेगी, बल्कि युवा वर्ग को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा भी प्राप्त होगी। छत्तीसगढ़ी कविता और लोकगीतों के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। छत्तीसगढ़ी बोली के प्रमुख कवि रामेश्वर वैष्णव, रामेश्वर शर्मा, मीर अली मीर, शशि सुरेंद्र दुबे उपस्थित रहेंगे। लोकगीत सत्र में डॉ. पी.सी. लाल यादव, शकुंतला तरार, बिहारीलाल साहू और डॉ. विनय कुमार पाठक अपनी प्रस्तुतियाँ देंगे।
आज के डिजिटल युग में जब पठन-पाठन की आदत कमजोर पड़ती जा रही है, ऐसे समय में साहित्य उत्सव का आयोजन अत्यंत प्रासंगिक है। यह आयोजन पाठकों और लेखकों के बीच सीधा संवाद स्थापित करेगा और विचारों के आदान-प्रदान से समाज में बौद्धिक समृद्धि को बढ़ावा देगा। साथ ही, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए यह उत्सव ज्ञानवर्धन का एक महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध होगा। रायपुर का साहित्य उत्सव का उद्देश्य केवल पुस्तकों और लेखकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में वैचारिक संवाद को प्रोत्साहित करने का माध्यम भी है। इस उत्सव में देश-प्रदेश के प्रतिष्ठित साहित्यकार, कवि, कथाकार, आलोचक और युवा लेखक एक साथ मंच साझा करेंगे। कविता पाठ, कहानी वाचन, परिचर्चा, पुस्तक विमोचन और संवाद सत्र जैसे विविध कार्यक्रमों के माध्यम से साहित्य के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। रायपुर में आयोजित यह साहित्य उत्सव साय सरकार की साहित्य और संस्कृति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह आयोजन न केवल साहित्य प्रेमियों के लिए एक उत्सव होगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास सिद्ध होगा।