शह मात The Big Debate: ‘पंडुम’ पर पॉलिटिक्स..विवाद का एजेंडा फिक्स! पंडुम शब्द के सरकारी यूज का विरोध, आदिवासी समाज के एक धड़े को क्यों है एतराज?
Bastar Pandum 2026: 'पंडुम' पर पॉलिटिक्स..विवाद का एजेंडा फिक्स! पंडुम शब्द के सरकारी यूज का विरोध, आदिवासी समाज के एक धड़े को क्यों है एतराज?
Bastar Pandum 2026/Image Source: IBC24 File
- ‘पंडुम’ बना सियासी रणभूमि!
- बस्तर पंडुम पर बवाल
- आस्था बनाम सरकार आमने-सामने
Bastar Pandum 2026: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बस्तर पंडुम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बस्तर की संस्कृति और कला से जुड़ी प्रदर्शनी एवं प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। हालांकि, इस आयोजन को लेकर सर्व आदिवासी समाज ने आपत्ति जताई है। समाज का कहना है कि सरकार उनके धार्मिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक त्योहारों का सरकारीकरण कर आदिवासी आस्था पर चोट पहुंचा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस विरोध के पीछे ठोस तर्क हैं, या फिर ‘पंडुम’ को लेकर सियासत की जा रही है।
इस साल हो रहा है ‘बस्तर पंडुम’ (Bastar tribal festival)
Bastar Pandum 2026: छत्तीसगढ़ की जनजातीय पहचान, लोक संस्कृति और परंपराओं का सबसे बड़ा उत्सव माने जाने वाले ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन बस्तर अंचल की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, रहन-सहन, लोककला, पारंपरिक खान-पान, वेशभूषा, गीत-संगीत और नृत्य परंपराओं को एक मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास है। लेकिन अब इसी आयोजन के नाम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सर्व आदिवासी समाज का आरोप है कि सरकार ‘पंडुम’ शब्द का गलत इस्तेमाल कर रही है।
क्या ‘पंडुम’ पर विवाद ज़रूरी है? (Bastar Pandum controversy)
Bastar Pandum 2026: मामले में कांग्रेस भी सरकार पर हमलावर है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया कि भाजपा ‘पंडुम’ शब्द के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग कर रही है। वहीं भाजपा ने कांग्रेस और आदिवासी समाज के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए पलटवार किया है। यानी जिस बस्तर पंडुम आयोजन के ज़रिये बस्तर की संस्कृति को देश-दुनिया में पहचान दिलाने का दावा किया जा रहा है, उसी शब्द को लेकर अब विवाद गहराता जा रहा है। सवाल यह है कि क्या इस विरोध के पीछे कोई ठोस आधार है, या फिर यह केवल राजनीतिक विरोध का नया मंच बन गया है।
बस्तर पंडुम 2026 का उद्देश्य (Chhattisgarh tribal culture)
- 10 जनवरी से 5 फरवरी तक तीन चरणों में आयोजन
- बस्तर की संस्कृति और कला की प्रदर्शनी एवं प्रतियोगिता
- 12 विधाओं में प्रदर्शन और प्रतियोगिताएं
- जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य और वाद्ययंत्रों की प्रस्तुति
- शिल्प, चित्रकला, जनजातीय पेय पदार्थ और पारंपरिक व्यंजनों की प्रदर्शनी
- वन-औषधि और देवगुड़ियों के संरक्षण व प्रचार-प्रसार का लक्ष्य
क्या है बस्तर पंडुम? (Bastar cultural event)
Bastar Pandum 2026: ‘पंडुम’ शब्द का अर्थ ही उत्सव होता है। वास्तव में यह आयोजन बस्तर की आत्मा, उसकी सांस्कृतिक चेतना और सामुदायिक जीवन का जीवंत प्रतिबिंब है। बस्तर पंडुम केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही जनजातीय विरासत के संरक्षण और संवर्धन का सशक्त माध्यम माना जाता है।

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