छत्तीसगढ़ में बिछ गई चुनावी बिसात, योद्धा तैयार, जातिगत समीकरण पर ज्यादा भरोसा
छत्तीसगढ़ में बिछ गई चुनावी बिसात, योद्धा तैयार, जातिगत समीकरण पर ज्यादा भरोसा
रायपुर। छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक बिसात बिछ चुकी है। बीजेपी-कांग्रेस के सभी 90 सीटों पर प्रत्याशी तय हो चुके हैं। इसके साथ जोगी कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन के उम्मीदवार भी तय हो गए हैं। ऐसे में सियासी पारा चढ़ने लगा है। टिकट वितकण में सबसे खास बात यह रही कि सभी पार्टियों ने जातिगत समीकरण पर खास जोर दिया है। राजनीति में वोटरों को साधने के लिए समाज के लोगों को टिकट देने की परंपरा जैसी बन गई है। 90 विधानसभा सीटों में से 39 सीटें आरक्षित हैं, जिसमें से 29 एसटी और 10 एससी वर्ग के लिए है। शेष 51 सीटें सामान्य वर्ग के लिए हैं, हालांकि 51 सामान्य सीट में से 11 पर एससी वर्ग का प्रभाव माना जाता है। यही वजह है कि सामान्य सीट में दूसरे समाज को महत्व मिलता है। जातिगत समीकरण पर गौर करें तो प्रदेश की आधी से ज्यादा सीटों पर पिछड़ा वर्ग का दबदबा दिखता है। राज्य की करीब 47 फीसदी आबादी भी पिछड़ा वर्ग की है। इसलिए एक चौथाई विधायक इसी वर्ग से आते हैं।
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राज्य में पिछले तीन चुनाव के आंकड़ों पर गौर करें तो एसटी और एससी वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर भाजपा को बढ़त मिली है। राज्य बनने के बाद हुए पहले चुनाव 75 फीसदी एसटी सीटें भाजपा ने जीती थीं। इसके बाद साल 2008 के चुनाव में 66 और 2013 के चुनाव में 36 प्रतिशत सीट पर जीत मिली थी। हालांकि कांग्रेस ने साल 2008 के मुकाबले 4 सीटें ज्यादा लाई, लेकिन 2003 के मुकाबले एक सीट कम है। तीनों चुनावों में 60 प्रतिशत एससी सीटें भाजपा ने जीतीं जबकि पिछले यानी 2013 के चुनाव में एससी सीटों पर कांग्रेस का सुपड़ा साफ हो गया था और केवल एक सीट पर जीत मिली थी। 90 फीसदी यानी 9 सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवार जीतकर आए थे। सामान्य सीटें जीतने में कांग्रेस भाजपा से औसतन 4 फीसदी आगे है।
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साल 2008 में परिसीमन के बाद ओबीसी वर्ग का दबदबा और बढ़ गया। 2003 में 19 ओबीसी विधायक सदन में पहुंचे। 2013 में यह संख्या बढ़कर 24 हो गई। 2008 के चुनाव में भाजपा को परिसीमन का फायदा हुआ। इस चुनाव में भाजपा के 13 ओबीसी विधायक चुने गए, जबकि कांग्रेस के 8 थे। हालांकि, 2013 में कांग्रेस ने इस गैप को पाटते हुए संख्या बराबर कर ली। सामान्य वर्ग की 51 सीटों में से 25 पर ओबीसी मतदाताओं का दबदबा है। प्रदेश में करीब 47 फीसदी वोटर ओबीसी हैं।
यही कारण है कि चुनाव नजदीक आते ही और टिकट वितरण के समय सोशल इंजीनियरिंग की याद आती है और शुरू होता है समाज के ताने-बाने का गुणा-भाग है।
छत्तीसगढ़ में एसटी-एससी से ज्यादा ओबीसी हैं। सबसे ज्यादा मतलब 47 फीसदी। इस आबादी में 95 से ज्यादा जातियां हैं। इन जातियों में 12 फीसदी साहू हैं। साहू बीजेपी का वोटबैंक माना जाता है और पार्टी सबसे ज्यादा साहू उम्मीदवार पर भरोसा जताती है। इस बार भी भाजपा ने साहू समाज के 14 लोगों को टिकट दी है। पिछड़ा वर्ग के दूसरे समाज क साधने के इरादे से संगठन में उन्हें महत्व दिया जाता है। इस समय दोनों पार्टियों में कुर्मी वोट बैंक को तवज्जो देने के लिहाज प्रदेश अध्यक्ष कुर्मी समाज के हैं।
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छत्तीसगढ़ में सोशल इंजीनियरिंग से परे कई सीट ऐसी हैं, जहां पर चेहरा काम आता है। ऐसे में यहां जातिगत समीकरण मायने नहीं रखता है। ऐसी सीटों में से एक राजनांदगांव सीट है, जहां से मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह तीसरी बार राजनांदगांव से चुनाव लड़ेंगे। उनके सामने भी चेहरे को ही उतारा जाता है। कांग्रेस ने यहां से इस बार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला को खड़ा किया है। इसी तरह अंबिकापुर की सीट है, जहां पर नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव चेहरा हैं। उनके मुकाबले अनुराग सिंहदेव होंगें।
सामाजिक समीकरण पर एक नजर ( सीटों के आधार पर)
समाज भाजपा कांग्रेस
साहू 14 8
कुर्मी 9 7
ब्राह्मण 5 9
अग्रवाल 4 2
जैन 3 1
यादव 1 3
क्षत्रीय 6 4
कांग्रेस ने दो मुस्लिम मो. अकबर, बदरुद्दीन कुरैशी को उतारा जबकि भाजपा से कोई नहीं है। कांग्रेस ने तीन सिख कुलदीप जुनेजा, गुरुमुख सिंह होरा और आशीष छाबड़ा को टिकट दिया, लेकिन भाजपा ने इस समाज से किसी को भी टिकट नहीं दी है।
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वोटरों की संख्या ( सामाजिक आधार पर)
- 32 फीसदी एसटी, 13 फीसदी एससी, 47 फीसदी ओबीसी
- 95 से अधिक जातियां ओबीसी में
- 12 प्रतिशत साहू समाज के मतदाता
- 9 प्रतिशत यादव समाज के वोटर
- 5 प्रतिशत मरार, निषाद व कुर्मी
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साल 2018 के भाजपा-कांग्रेस प्रत्याशियों की सूची और 2013 के विजयी उम्मीदवार
सीट विजयी उम्मीदवार पार्टी 2013 हारने वाला प्रत्याशी भाजपा प्रत्याशी कांग्रेस प्रत्याशी
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सीट |
विजयी उम्मीदवार |
2013 हारने वाला प्रत्याशी |
भाजपा प्रत्याशी |
कांग्रेस प्रत्याशी |
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भरतपुर-सोनहट (अ.ज.जा.) |
चंपा देवी पावले |
गुलाब कमरो INC |
चंपादेवी पावले |
गुलाब सिंह कमरो |
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मनेन्द्रगढ़ |
श्याम बिहारी जायसवाल |
गुलाब सिंह INC |
श्याम बिहारी जायसवाल |
डॉ. विनय जायसवाल |
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बैकुंठपुर |
भैया लाल राजवाड़े |
बदंति तिवारी INC |
भैया लाल राजवाड़े |
अम्बिका सिंह देव |
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प्रेमनगर |
खेलसाय सिंह |
रेणुका सिंह BJP |
विजय प्रताप सिंह |
खेलसाय सिंह |
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भटगांव |
पारस नाथ राजवाडे |
रजनी त्रिपाठी BJP |
रजनी त्रिपाठी |
पारसनाथ राजवाड़े |
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प्रतापपुर (अ.ज.जा.) |
रामसेवक पैकरा |
डॉ प्रेमसाय सिेह टेकाम INC |
राम सेवक पैकरा |
प्रेमसाय सिंह टेकाम |
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रामानुजगंज (अ.ज.जा.) |
बृहस्पत सिंह |
राम विचार नेताम BJP |
रामकिशुन सिंह |
बृहस्पति सिंह |
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सामरी (अ.ज.जा.) |
डॉ. प्रीतम राम |
सिद्धनाथ पैकरा BJP |
सिद्धनाथ पैकरा |
चिंतामणी महाराज |
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लुण्ड्रा (अ.ज.जा.) |
चिन्तामणी महाराज |
विजयनाथ सिंह BJP |
विजयनाथ सिंह |
डॉ. प्रीतम राम |
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अम्बिकापुर |
टी.एस. सिंहदेव |
अनुराग सिंहदेव BJP |
अनुराग सिंहदेव |
टीएस सिंह देव |
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सीतापुर (अ.ज.जा.) |
अमरजीत भगत |
राजराम भगत BJP |
गोपाल राम भगत |
अमरजीत भगत |
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जशपुर (अ.ज.जा.) |
राजशरण भगत |
सरहुल राम भगत INC |
गोविंद राम भगत |
रामपुकार सिंह |
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कुनकुरी (अ.ज.जा.) |
रोहित कुमार साय |
अब्राहम तिर्की INC |
भरत साय |
उत्तमदान मिंज |
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पत्थलगांव (अ.ज.जा.) |
शिवशंकर पैकरा |
रामपुकार सिंह INC |
शिवशंकर पैंकरा |
रामपुकार सिंह |
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लैलूंगा (अ.ज.जा.) |
सुनीती सत्यानंद राठिया |
हृदयराम राठिया INC |
सत्यानंद राठिया |
चक्रधर प्रसाद सिडार |
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रायगढ |
रोशन लाल अग्रवाल |
शक्राजीत नायक INC |
रौशन लाल |
अग्रवाल प्रकाश नायक |
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सारंगढ (अ.जा.) |
केराबाई मनहर |
पदमा घनश्याम मनहर INC |
केराबाई मनहर |
उत्तरी जांगड़े |
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खरसिया |
उमेश पटेल |
डा. जवाहरलाल नायक BJP |
ओमप्रकाश चौधरी |
उमेश पटेल |
वेब डेस्क, IBC24

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