Chhattisgarh School New Schedule : छत्तीसगढ़ के स्कूलों में अब पढ़ाई के साथ ‘गायत्री और भोजन मंत्र’ अनिवार्य, सरकार के नए आदेश से पूरे प्रदेश में मचा भारी बवाल! इस्लामी कोर्ट ने उठाए सवाल

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छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों के लिए नया दैनिक शेड्यूल जारी किया गया है। अब राष्ट्रगान, सरस्वती वंदना, गायत्री मंत्र और भोजन मंत्र का पाठ कराया जाएगा। सरकार इसे संस्कार और राष्ट्रभक्ति से जोड़ रही है, जबकि विपक्ष और कुछ धार्मिक संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई है।

  • Reported By: hemant sharma

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  • Publish Date - June 13, 2026 / 05:10 PM IST,
    Updated On - June 13, 2026 / 05:19 PM IST

Chhattisgarh School New Schedule / Image Source : FILE / ai

HIGHLIGHTS
  • स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रार्थना से छुट्टी तक का नया शेड्यूल जारी किया।
  • राष्ट्रगान, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र और गायत्री मंत्र को शामिल किया गया
  • कांग्रेस और कुछ धार्मिक संगठनों ने फैसले पर सवाल उठाए।

रायपुर : Chhattisgarh School New Schedule :  छत्तीसगढ़ के स्कूलों में अब पढ़ाई के साथ राष्ट्रभक्ति, अध्यात्म और सांस्कृतिक मूल्यों का भी पाठ पढ़ाया जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूलों के लिए नया दैनिक शेड्यूल जारी किया है, जिसके तहत प्रार्थना से लेकर छुट्टी तक राष्ट्रगान, राज्यगीत, सरस्वती वंदना, गायत्री मंत्र और भोजन मंत्र का पाठ कराया जाएगा। सरकार इसे नई पीढ़ी को संस्कार और देशभक्ति से जोड़ने का अभियान बता रही है, लेकिन विपक्ष और कुछ धार्मिक संगठनों ने इसे राजनीतिक एजेंडा और धार्मिक थोपने की कोशिश करार दिया है।

आखिर क्या है पूरा मामला ?

Deepak Baij On School Controversy अब छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में सुबह की शुरुआत सिर्फ प्रार्थना से नहीं, बल्कि राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीप मंत्र, गुरु मंत्र, सरस्वती वंदना और महापुरुषों की जीवनी के वाचन से होगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूलों के लिए नया शेड्यूल तय किया है। मध्यान्ह भोजन से पहले बच्चों को भोजन मंत्र का पाठ कराया जाएगा, जबकि छुट्टी के समय राज्यगीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र का वाचन होगा। सरकार का दावा है कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों में नैतिक मूल्यों, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करना है। डिप्टी सीएम अरुण साव ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि राष्ट्रगान, राज्यगीत और गायत्री मंत्र भारतीय जीवन पद्धति का हिस्सा हैं और नई पीढ़ी को अध्यात्म और देशभक्ति से जोड़ने का यह बड़ा अभियान है।

कांग्रेस ने करार दिया प्रोपेगेंडा

हालांकि इस फैसले को लेकर प्रदेश में सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक प्रोपेगेंडा बताते हुए सरकार पर मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया है।प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का कहना है कि यह कोई नया चीज नहीं है। बचपन में सभी लोग प्रार्थना करते हुए यहां तक पहुंचे है। सब मंत्र पढ़ा लो आपत्ति नहीं लेकिन स्कूलों के हालत क्या है उसको भी देखे। भवन जर्जर है,स्कूल भगवान भरोसे चल रहा है और स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं है। मुद्दे से भटकाने के लिए ऐसा आदेश जारी करना सरकार की मजबूरी है।

Raipur Islamic Court Maulana Ashraf Jilani इस्लामी कोर्ट ने जताई आपत्ति

वहीं रायपुर इस्लामी कोर्ट ने भी इस आदेश पर आपत्ति जताई है। मौलाना सैय्यद अशरफ जिलानी का कहना है कि सरकार को स्कूल का नाम बदलकर गुरुकुल रख देना चाहिए , हमने भी बचपन से जनगण मन और वंदे मातरम पढ़ा है लेकिन इस बात का प्रमाण है कि इन चीजों को आप किसी पर थोपना चाह रहे है। छत्तीसगढ़ और हिंदुस्तान की जमीन पर कई सारे समाज और जाति के लोग पढ़ते हैं। सब की जाति के अनुसार स्कूल खोल दीजिए और उसके बाद सबको सब का मंत्र दे दीजिए। यह अनुच्छेद 25 का उल्लंघन है।

सरकार को स्कूल की नीतियों की कमी में ध्यान देना चाहिए

उन्होंने यह भी कहा कि इस सबको सामने रखकर प्रोपेगेंडा रचा जा रहा है। सरकार को स्कूल की नीतियों में क्या कमी है इस पर ध्यान देना चाहिए। नीट के पेपर चोरी हो जाती है इस पर कोई ध्यान नहीं है। मुद्दे से भटकाने के लिए गायत्री मंत्र और वंदे मातरम पढ़िए कहा जा रहा है। छात्र पढ़ लिखकर देश की तरक्की की बात करेगा। गायत्री मंत्र पढ़ेगा तो सिर्फ पूजा अर्चना करता रह जाएगा। इससे पंडित और मौलाना पैदा कर सकते हैं लेकिन डॉक्टर,वैज्ञानिक पैदा नहीं कर सकते हैं। फिलहाल स्कूल शिक्षा विभाग के इस आदेश ने शिक्षा के साथ-साथ राजनीति और एक नई बहस को भी हवा दे दी है। अब देखना होगा कि सरकार इस फैसले को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब कैसे देती है और इसका असर स्कूलों के माहौल पर किस रूप में दिखाई देता है।

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