Kawardha SP Promotion Case: छत्तीसगढ़ में IPS प्रमोशन-ट्रांसफर पर सियासत शुरू.. कांग्रेस का आरोप, “सरकार एससी-एसटी के साथ भेदभाव कर रही है’..

Kawardha SP Promotion Case: छवई ने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद-16 के तहत समान अवसर के अधिकार का खुला उल्लंघन बताया है। पत्र में यह भी कहा गया है कि समान परिस्थिति वाले अधिकारियों को पदोन्नत किया गया, जबकि उनके साथ भेदभाव किया गया, जिससे उनका मनोबल आहत हुआ है।

Kawardha SP Promotion Case: छत्तीसगढ़ में IPS प्रमोशन-ट्रांसफर पर सियासत शुरू.. कांग्रेस का आरोप, “सरकार एससी-एसटी के साथ भेदभाव कर रही है’..

Kawardha SP Promotion Case || Image- IBC24 News File

Modified Date: January 29, 2026 / 01:05 pm IST
Published Date: January 29, 2026 1:05 pm IST
HIGHLIGHTS
  • कवर्धा एसपी ने सरकार पर लगाया भेदभाव आरोप
  • कांग्रेस ने प्रमोशन नीति पर उठाए सवाल
  • लंबित जांच के बावजूद पदोन्नति से वंचित

रायपुर: कवर्धा के पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र छवई द्वारा राज्य सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। (Kawardha SP Promotion Case) इस मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कवर्धा एसपी का बयान सरकार के लिए गंभीरता से सोचने का विषय है।

दीपक बैज ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार प्रमोशन और स्थानांतरण की प्रक्रिया में एससी-एसटी और विशेष वर्ग के अधिकारियों के साथ भेदभाव कर रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, जो सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करती हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कवर्धा के पुलिस अधीक्षक ने एक सही और संवेदनशील मुद्दा उठाया है।

क्या हैं प्रमोशन का पूरा विवाद?

दरअसल छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में पदोन्नति को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। (Kawardha SP Promotion Case) भारतीय पुलिस सेवा (IPS) 2012 बैच के कवर्धा पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह छवई ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपने साथ हुए कथित अन्याय, भेदभाव और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन की पीड़ा व्यक्त की है। पत्र में अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि नियमों के बावजूद उन्हें जानबूझकर पदोन्नति से वंचित किया गया।

नाम पर विचार करने के बाद भी नहीं मिली पदोन्नति

धर्मेंद्र सिंह छवई वर्तमान में कवर्धा पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं और पुलिस मुख्यालय द्वारा समय-समय पर जारी की गई पदोन्नति सूचियों (10 अक्टूबर 2024, 31 दिसंबर 2024, 26 मई 2025 और 31 जुलाई 2025) में उनके नाम पर विचार किया गया, लेकिन उन्हें पदोन्नत नहीं किया गया। इसका कारण बताया गया कि उनके विरुद्ध लोकायुक्त संगठन, भोपाल में जांच लंबित है।

गंभीर आरोप वाले अधिकारियों की पदोन्नति!

अधिकारी ने अपने दर्द को शब्दों में बयां करते हुए लिखा है कि जिन अधिकारियों पर उनसे कहीं अधिक गंभीर आरोप हैं, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज हैं और जिन मामलों में न्यायालय से अंतिम रिपोर्ट तक नहीं आई है, उन्हें पदोन्नति का लाभ दे दिया गया। (Kawardha SP Promotion Case) जबकि उनके मामले में न तो चार्जशीट जारी हुई है और न ही कोई विभागीय कार्यवाही लंबित है।

न ही अधिकारी निलंबित हुए और न ही आरोप पत्र जारी हुआ

पत्र में भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा 15 जनवरी 1999 को जारी पदोन्नति नियमों का हवाला देते हुए बताया गया है कि यदि अधिकारी निलंबित नहीं है, आरोप पत्र जारी नहीं हुआ है और न्यायालय में आपराधिक मामला लंबित नहीं है, तो उसे पदोन्नति से वंचित नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद उन्हें वरिष्ठ वेतनमान और उप पुलिस महानिरीक्षक (DIG) के पद पर पदोन्नति नहीं दी गई।

समान अवसर के अधिकार का खुला उल्लंघन

छवई ने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद-16 के तहत समान अवसर के अधिकार का खुला उल्लंघन बताया है। पत्र में यह भी कहा गया है कि समान परिस्थिति वाले अधिकारियों को पदोन्नत किया गया, जबकि उनके साथ भेदभाव किया गया, जिससे उनका मनोबल आहत हुआ है। (Kawardha SP letter CM Vishnu deo sai) अधिकारी के इस पत्र ने पुलिस विभाग में पदोन्नति प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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