Nano Urea Benefits and Disadvantages: नैनो यूरिया-डीएपी बन रही किसानों की पहली पसंद, पैसों की बचत के साथ मिट्टी की उर्वरता को नहीं होता नुकसान, उत्पादन भी ताबड़तोड़

Ads

Nano Urea Benefits and Disadvantages: नैनो यूरिया-डीएपी बन रही किसानों की पहली पसंद, पैसों की बचत के साथ मिट्टी की उर्वरता को नहीं होता नुकसान, उत्पादन भी ताबड़तोड़

  •  
  • Publish Date - May 31, 2026 / 12:13 PM IST,
    Updated On - May 31, 2026 / 12:15 PM IST

Nano Urea Benefits and Disadvantages: नैनो यूरिया-डीएपी बन रही किसानों की पहली पसंद, पैसों की बचत के साथ मिट्टी की उर्वरता को नहीं होता नुकसान, उत्पादन भी ताबड़तोड़ / Image: AI Generated

HIGHLIGHTS
  • नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों की नई पसंद
  • खाद की लागत में प्रति एकड़ 250 रुपये तक की बचत संभव
  • उत्पादन बढ़ाने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता भी होगी बेहतर

रायपुर: Nano Urea Benefits and Disadvantages खेती में बढ़ती लागत, मिट्टी की घटती उर्वरा शक्ति और रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से पैदा हो रही चुनौतियों के बीच अब नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए एक उपयोगी और लोकप्रिय विकल्प बन गई है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि किसान संतुलित और वैज्ञानिक तरीके से इनका उपयोग करें तो इससे खेती की लागत कम करने, उत्पादन बेहतर बनाने और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों की नई पसंद

Nano Urea Benefits and Disadvantages विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाए रखने के लिए उर्वरकों के उपयोग के तौर-तरीकों में बदलाव जरूरी होगा। यही कारण है कि अब किसानों के बीच नैनो उर्वरकों को लेकर रुचि बढ़ रही है। छत्तीसगढ़ सहित देश के अधिकांश धान उत्पादक क्षेत्रों में सामान्यतः प्रति एकड़ 2 से 3 बोरी यूरिया और 1 बोरी डीएपी का उपयोग किया जाता है। मौजूदा कीमतों के अनुसार एक बोरी यूरिया की कीमत लगभग 270 रुपए और एक बोरी डीएपी की कीमत लगभग 1350 रुपए है। इस प्रकार केवल यूरिया और डीएपी पर प्रति एकड़ करीब 1900 से 2200 रुपये तक खर्च हो जाता है।

बोरी यूरिया के बराबर 500 मिलीलीटर नैनो यूरिया

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार 500 मिलीलीटर नैनो यूरिया की एक बोतल का प्रभाव लगभग एक बोरी पारंपरिक यूरिया के बराबर माना जाता है। फसल में दो चरणों में छिड़काव के जरिए पारंपरिक यूरिया की जरूरत को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यदि किसान 2 बोरी ठोस यूरिया की जगह 2 बोतल नैनो यूरिया का उपयोग करते हैं तो अनुमानित खर्च 100 रुपए प्रति एकड़ बचत होती है। दो बोरी पारंपरिक यूरिया का मूल्य लगभग 540 रुपए है। इसके स्थान पर 2 बोतल नैनो यूरिया लगभग 450-500 में आता है। यानि सीधे खाद लागत में बचत के साथ-साथ परिवहन, भंडारण और मजदूरी खर्च में भी कमी आती है।

नैनो डीएपी से प्रति एकड़ 150 रुपए तक की बचत

इसी प्रकार कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि 50 किलो डीएपी की पूरी मात्रा उपयोग करने के बजाय यदि किसान 25 किलो डीएपी के साथ 500 मिली नैनो डीएपी का उपयोग करें तो प्रति एकड़ लगभग 75 से 150 रुपए तक की बचत होती है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार पारंपरिक यूरिया का बड़ा हिस्सा मिट्टी, पानी और वातावरण में नष्ट हो जाता है। इसके विपरीत नैनो यूरिया के सूक्ष्म कण सीधे पौधों द्वारा तेजी से अवशोषित किए जाते हैं। इससे पौधों को संतुलित पोषण मिलता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक संतुलित उपयोग की स्थिति में इसके कई सकारात्मक परिणाम सामने आए है।फसल की बढ़वार बेहतर होती है। पौधों की हरियाली लंबे समय तक बनी रहती है। दानों का भराव मजबूत होता है।उत्पादन की गुणवत्ता सुधरती है। उर्वरकों की उपयोग दक्षता बढ़ती है। कई कृषि परीक्षणों में 5 से 8 प्रतिशत तक उत्पादन वृद्धि के संकेत भी मिले हैं। कृषि क्षेत्र के जानकार बताते हैं कि लगातार अधिक मात्रा में रासायनिक खाद के उपयोग से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। नैनो उर्वरकों का संतुलित उपयोग मिट्टी में पोषक तत्वों के संतुलन को बनाए रखने में मदद कर सकता है। इसके अलावा रासायनिक अवशेष कम होते हैं।भूजल प्रदूषण घटता है।मिट्टी की जैविक सक्रियता बेहतर बनी रहती है।पर्यावरणीय प्रभाव कम होता है।इसी कारण वैज्ञानिक खेती में अब संतुलित उर्वरक उपयोग पर अधिक जोर दिया जा रहा है ।

किसानों को घबराने की जरूरत नहीं

वैज्ञानिक सलाह के अनुसार संतुलित रूप से नैनो उर्वरकों का उपयोग बढ़ाते हैं तोआयातित उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी है।विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी। देश में उर्वरक उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। उत्पादन इकाइयों में रोजगार बढ़ेगा। कृषि क्षेत्र आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ेगा। कृषि विभाग के अनुसार प्रदेश में पारंपरिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है और किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। रायपुर जिले की समितियों में वर्तमान मे यूरिया की उपलब्धता 9,102 मीट्रिक टन और कुल भंडारित यूरिया की मात्रा 10,732 मीट्रिक टन है, जब कि डीएपी की उपलब्धता 3,092 मीट्रिक टन और कुल भंडारित डीएपी की मात्रा 3,927 मीट्रिक टन है। इसके साथ ही कृषि सेवा केंद्रों और समितियों के माध्यम से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की उपलब्धता भी बढ़ाई जा रही है ताकि किसान आवश्यकता और उपयोगिता के आधार पर इन विकल्पों का इस्तेमाल कर सकें।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वैज्ञानिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग और आधुनिक तकनीकों का समन्वय ही खेती को अधिक लाभकारी बनाएगा। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी विकल्प माना जा रहा है, जो कम लागत, बेहतर उत्पादन और मिट्टी की सुरक्षा तीनों मोर्चों पर किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

ये भी पढ़ें

नैनो यूरिया क्या है और इसका क्या फायदा है?

नैनो यूरिया एक तरल उर्वरक है, जिसके सूक्ष्म कण पौधों द्वारा तेजी से अवशोषित किए जाते हैं। इससे उर्वरक की उपयोग दक्षता बढ़ती है और लागत कम होती है।

नैनो यूरिया से किसानों को कितनी बचत हो सकती है?

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार 2 बोरी पारंपरिक यूरिया के स्थान पर 2 बोतल नैनो यूरिया उपयोग करने पर प्रति एकड़ लगभग 100 रुपये तक की बचत हो सकती है।

नैनो डीएपी से कितना लाभ मिलता है?

25 किलो डीएपी के साथ 500 मिली नैनो डीएपी के उपयोग से किसानों को प्रति एकड़ लगभग 75 से 150 रुपये तक की बचत हो सकती है।

क्या नैनो उर्वरकों से उत्पादन बढ़ता है?

कृषि परीक्षणों में नैनो उर्वरकों के संतुलित उपयोग से 5 से 8 प्रतिशत तक उत्पादन वृद्धि के संकेत मिले हैं। इससे फसल की बढ़वार और दानों का भराव भी बेहतर होता है।

क्या छत्तीसगढ़ में यूरिया और डीएपी की कमी है?

नहीं। कृषि विभाग के अनुसार प्रदेश में यूरिया और डीएपी का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है। साथ ही नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की उपलब्धता भी बढ़ाई जा रही है।