राजेश मिश्रा/रायपुर। deduction in tribal reservation फिलहाल ये छत्तीसगढ़ की सियासत में सबसे मौजू सवाल बना हुआ है। आरक्षण को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट के फैसले के बाद एक ओर सत्तापक्ष और विपक्ष एक दूसरे को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं, तो दूसरी ओर आदिवासी वर्ग भी बेहद नाराज है। सर्व आदिवासी समाज के नेतृत्व में लामबंद होकर आदिवासी पूरे प्रदेश में प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी कड़ी में शुक्रवार को गरियाबंद में लगभग 4000 आदिवासी पारंपरिक हथियारों हुए रैली निकालकर कलेक्टोरेट का घेराव किया।
deduction in tribal reservation आरक्षण के मुद्दे पर सियासी बयानबाजी का सिलसिला भी बदस्तूर जारी है। वहीं आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ये साबित करने में जुटा है कि वो ST वर्ग को 32 फीसदी आरक्षण के पक्ष में है। कांग्रेस ये दावा कर रही है आरक्षण को यथावत करने सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। जहां देश के तीन बड़े वकील सरकार का पक्ष रखेंगे। तो वहीं बीजेपी बीजेपी ST मोर्चा 15 शनिवार से कांग्रेस के आदिवासी विधायकों का घेराव करेगी। इससे पहले बीजेपी बस्तर और सरगुजा संभाग में हाईवे पर चक्काजाम कर कलेक्टर को ज्ञापन सौंप चुकी है। आरक्षण में कटौती के लिए दोनों पक्ष एक दूसरे पर हमलावर हैं।
कुल मिलाकर आरक्षण के मुद्दे को लेकर कांग्रेस और बीजेपी खुद को आदिवासियों का हितैषी और सामने वाले को विलेन साबित करने में जुटी है। जाहिर है अगले साल सूबे में चुनाव है। ऐसे में बीजेपी और कांग्रेस दोनों नहीं चाहेगी कि आरक्षण के मुद्दे पर आदिवासी वोटर्स उसके खिलाफ जाए।