छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के अंत के साथ ही विकास के लिए तरस रहे ‘अति संवेदनशील’ गांव को पानी मिला

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के अंत के साथ ही विकास के लिए तरस रहे ‘अति संवेदनशील’ गांव को पानी मिला

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के अंत के साथ ही विकास के लिए तरस रहे ‘अति संवेदनशील’ गांव को पानी मिला
Modified Date: April 13, 2026 / 01:41 pm IST
Published Date: April 13, 2026 1:41 pm IST

रायपुर, 13 अप्रैल (भाषा) छत्तीसगढ़ में नक्सली खतरे के अंत होने और राज्य के नारायणपुर जिले के एक दूरस्थ गांव नेलांगुर को ‘‘अति संवेदनशील’’ क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत किए जाने के बाद आखिरकार वहां के लोगों को उनकी सबसे चिंता वाली जल आपूर्ति की कमी की समस्या से राहत मिली है।

अधिकारियों ने रविवार को बताया कि पहली बार गांव के हर घर में नल से पानी का कनेक्शन पहुंच गया है, जो अब चालू भी हो गया है। इस पहल से जीवन के लिए अनमोल पानी की कमी की समस्या के समाप्त होने के साथ ही लंबे समय से इसके लिए जारी संघर्ष का भी अंत हो गया है।

यह पहल ऐसे समय में की गई है जब छत्तीसगढ़ को 31 मार्च को सशस्त्र माओवादियों से मुक्त घोषित किए जाने के बाद कुछ ही दिन बीते है।

छत्तीसगढ़ और खासकर बस्तर क्षेत्र चार दशकों से अधिक समय से वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से जूझ रहा था। नारायणपुर, बस्तर क्षेत्र के सात जिलों में से एक है।

एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘‘महाराष्ट्र सीमा के समीप स्थित दुर्गम ओरछा ब्लॉक में बसा नेलांगुर कभी एक अति संवेदनशील क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत था। कठिन भूभाग और पहले की सुरक्षा चिंताओं के कारण राज्य प्रशासन के लिए यहां बुनियादी सेवाओं की आपूर्ति एक बहुत बड़ी चुनौती बन गई थी।’’

नारायणपुर की कलेक्टर नम्रता जैन ने एक विज्ञप्ति में कहा कि नल के पानी की उपलब्धता राज्य के सबसे दूरस्थ कोनों को विकास की मुख्यधारा में लाने के मकसद से किए जा रहे निरंतर प्रशासनिक प्रयासों को दर्शाती है।

उन्होंने कहा, “जल जीवन मिशन के तहत जल आपूर्ति प्रणाली स्थापित की गई। सौर ऊर्जा से संचालित होने वाले पंपों का उपयोग करके जलस्रोत से पानी प्राप्त किया जा रहा है और पाइपलाइन के जरिए सीधे घरों तक पहुंचाया जा रहा है। इससे बिजली ग्रिड पर निर्भरता कम करते हुए पानी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हुई है।”

उन्होंने कहा कि जिला मुख्यालय से 52 किलोमीटर दूर स्थित नेलांगुर के निवासियों के लिए यह परियोजना जीवन को बदल देने वाली साबित हुई है।

पानी लाने को पहले लंबी दूरी तय करने के लिए मजबूर रहने वाली महिलाओं ने कहा घर पर जलापूर्ति होने से उनकी दिनचर्या आसान हो गई और स्वच्छता के स्तर में सुधार हुआ है।

अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल अप्रैल में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और राज्य पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से गांव में एक सुरक्षा शिविर स्थापित किए जाने के बाद क्षेत्र में विकास की गति में काफी तेजी आई।

सरकार ने 31 मार्च को छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद मुक्त घोषित कर दिया।

सुरक्षा बलों ने घने जंगलों में नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाकर उन्हें कमजोर कर दिया, जिससे अधिकतर नक्सली नेता और कार्यकर्ता निष्क्रिय हो गए या उन्होंने हथियार डाल दिए थे।

भाषा यासिर मनीषा वैभव

वैभव


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