उमरिया: जिले में मध्यप्रदेश डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा गठित स्व-सहायता समूहों से जुडकर महिलाएं आर्थिक रूप से समृद्ध होते हुए आत्मनिर्भर बनने की दिशा में निरंतर आगे बढ रही हैं। इस आर्थिक प्रगति से महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार होने के साथ ही सामाजिक प्रतिष्ठा भी बढ़ रही है। मानपुर जनपद पंचायत परिसर में आजीविका कैंटीन (दीदी कैफे) चलाने वाली सिगुडी ग्राम की द्रोपदी पटेल प्रगति की इसी कड़ी में शामिल हैं। उन्होने बताया कि वर्ष 2018 में भारती महिला स्व सहायता समूह का गठन किया। आजीविका मिशन के माध्यम से गठित सीआरपी से 50 हजार रुपए का ऋण प्राप्त हुआ। ठेला बनवाया तथा जनपद कार्यालय मानपुर में कैफे का संचालन किया। प्रारंभ में संकोच एवं बिक्री कम होने से लाभ भी कम हो रहा था , जिससे निराशा होने लगी थी। ग्राहको से चर्चा कर कैटीन मे बनने वाली सामग्री की गुणवत्ता बढाने का प्रयास किया। अब सम्मानपूर्वक कैंटीन चलाते हुए स्वादिष्ट समोसे, चाय, नमकीन, बिस्किट सहित अन्य खाद्य एवं पेय सामग्री की बिक्री से रोजाना 1000 रुपए तक की आमदनी कमा रहीं हैं। द्रोपदी सरकार की योजना की मदद से आत्मनिर्भरता दिशा में आगें बढ रही हैं।
द्रोपदी ने बताया कि पति खेती किसानी करते है। पति-पत्नी दोनों की कमाई से भी परिवार का भरण-पोषण ठीक ढंग से होने लगा है। उन्होने बताया कि मध्यप्रदेश डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा गठित महिला स्व सहायता समूह और सरकार की योजनाओं की जानकारी मिली। भारती स्व सहायता समूह से जुडकर 10-10 रुपये की बचत करना प्रारंभ किया। परिवार में परेशानी के समय समूह से लोन लिया और समय पर ऋण राशि की अदायगी भी की। कार्य के प्रति निष्ठा और लगन तथा शासन की योजना का अनवरत लाभ मिलने से द्रोपदी का आत्मविश्वास बढता गया।
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जनपद पंचायत कार्यालय का स्टाफ एवं ग्रामीण तथा आस-पास के लोग द्रोपदी की कैंटीन में बने स्वादिष्ट समोसे तथा स्पेशल चाय के साथ-साथ कुरकुरे, बिस्किट लोग बडे चाव से खाते हैं। द्रोपदी इस व्यवसाय से होने वाली आमदनी से बेहद खुश हैं। अब वह अपने बच्चों को अच्छे प्राइवेट स्कूल में पढा रही है। द्रोपदी ने प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं तथा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें हृदय से धन्यवाद दिया है। द्रोपदी ने बताया कि समूह की अन्य महिलाएं भी इसी तरह से योजना का लाभ लेकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगें बढ रही हैं।