अयोध्या राम मंदिर में मुद्रा की अनधिकृत निकासी के 105 मामलों का एसआईटी रिपोर्ट में उल्लेख
अयोध्या राम मंदिर में मुद्रा की अनधिकृत निकासी के 105 मामलों का एसआईटी रिपोर्ट में उल्लेख
नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने इस बात का संज्ञान लिया है कि अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने मंदिर के गिनती कक्ष से मुद्रा की अनधिकृत निकासी या उसे छिपाने के 105 मामलों की पहचान की है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने अदालत द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट का अवलोकन किया। हालांकि, एसआईटी को ‘‘200 किलोग्राम चांदी की ईंटों, 38.288 किलोग्राम चांदी की ईंटों, चांदी के हार, चरण पादुका और रामचरितमानस से संबंधित चढ़ावे’’ के रखरखाव में कोई विसंगति नहीं मिली।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सोमवार को पीठ को बताया कि एसआईटी 25 सितंबर या उससे पूर्व पहला आरोपपत्र दाखिल करेगी। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिरीक्षक किरण एस. के नेतृत्व वाली एसआईटी ने कहा था कि उसने मूल्यवान चढ़ावे से संबंधित मीडिया और सोशल मीडिया में लगाए गए आरोपों का सत्यापन किया।
एसआईटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि मंदिर के तीर्थयात्री सुविधा केंद्र (पीएफसी) के गिनती कक्ष के सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल आंकड़ों से पता चला कि गिनती प्रक्रिया में शामिल अन्य लोगों की मदद से गिनती कक्ष से मुद्रा को अनधिकृत रूप से निकालने या छिपाने के 105 मामले सामने आए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आठ आरोपियों की पहचान की गई है और उनके खातों में जमा उन रकम का ब्यौरा दिया गया है जिनका कोई स्पष्ट स्रोत नहीं है। इसके साथ ही, उन चल और अचल संपत्तियों की जानकारी भी दी गई है जिनमें चोरी का पैसा लगाया गया था।
पीठ ने कहा, ‘‘वस्तु स्थिति रिपोर्ट में प्रत्येक आरोपी द्वारा गबन की गई अनुमानित राशि का भी उल्लेख किया गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि मौजूदा साक्ष्यों से पता चलता है कि मुद्रा के गबन की घटना गिनती कक्ष में ही गिनती और उसे संभालने के दौरान हुई।’’
पीठ ने कहा, ‘‘जांच कई पहलुओं पर एक साथ आगे बढ़ी है। इनमें गबन के संदिग्ध मामलों की पहचान, इसमें शामिल लोगों की पहचान और उनसे पूछताछ, संदिग्ध धनराशि का पता लगाना, वित्तीय और संपत्ति संबंधी जांच, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच, मूल्यवान वस्तुओं का सत्यापन तथा संबंधित चढ़ावे और बैंकिंग रिकॉर्ड का मिलान शामिल है।’’
एसआईटी की 16 सितंबर की रिपोर्ट में कहा गया है कि मूल्यवान वस्तुओं से संबंधित रिकॉर्ड और सामग्री की जांच की गई तथा उनके सत्यापन में कोई विसंगति नहीं पाई गई।
रिपोर्ट में कहा गया कि 803 वस्तुएं भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के एक लॉकर में रखी गई थीं। इन सभी की भौतिक रूप से जांच की गई और इनमें कोई विसंगति नहीं पाई गई।
आदेश में कहा गया, ‘‘रिपोर्ट से पता चलता है कि 803 मूल्यवान वस्तुओं के लिए टीसीएस सॉफ्टवेयर से तैयार की गई रसीदों का सत्यापन किया गया है और उनसे संबंधित रिकॉर्ड न्यास के पास पाए गए हैं। ये वस्तुएं एसबीआई के एक लॉकर में रखी गई हैं, जिसकी भौतिक रूप से जांच की गई। इन 803 वस्तुओं के संबंध में सत्यापन के दौरान कोई विसंगति नहीं पाई गई।’’
रिपोर्ट में कहा गया है कि 86 और कीमती सामानों की अलग से पहचान की गई और उनकी भौतिक रूप से जांच की गई, जिनकी रसीदें जारी नहीं की गई थीं।
एसआईटी ने लगभग 944.411 किलोग्राम चांदी से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की, जिसे न्यास ने पिघलाने के लिए ‘सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड को भेजा था।
रिपोर्ट में कहा गया कि 14 सितंबर तक 173 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके थे। जिन लोगों से पूछताछ की गई, उनमें न्यास के पदाधिकारी, लेखा कर्मी, बैंक अधिकारी, सुरक्षा कर्मी और चार्टर्ड अकाउंटेंट शामिल थे।
इससे पहले, शीर्ष अदालत ने चढ़ावे की कथित चोरी की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के अनुरोध वाली याचिकाओं पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास को भी नोटिस जारी किया था।
राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन में अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह समेत कई याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष अदालत का रुख किया था। उन्होंने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने और मंदिर न्यास के वित्तीय मामलों का ‘फॉरेंसिक ऑडिट’ कराने संबंधी निर्देश का अनुरोध किया था।
भाषा आशीष नरेश
नरेश

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