अरुणाचल की पनबिजली परियोजना के लिए काटे जा सकते हैं 1.35 लाख पेड़; मप्र में लगाए जाएंगे पेड़

अरुणाचल की पनबिजली परियोजना के लिए काटे जा सकते हैं 1.35 लाख पेड़; मप्र में लगाए जाएंगे पेड़

अरुणाचल की पनबिजली परियोजना के लिए काटे जा सकते हैं 1.35 लाख पेड़; मप्र में लगाए जाएंगे पेड़
Modified Date: September 26, 2026 / 09:21 pm IST
Published Date: September 26, 2026 9:21 pm IST

नयी दिल्ली, 26 सितंबर (भाषा) पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने अरुणाचल प्रदेश में एक पनबिजली परियोजना को मंजूरी दी है, जिसकी वजह से 2,700 हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि का इस्तेमाल दूसरी चीजों के लिए करना पड़ सकता है और 1.35 लाख से ज़्यादा पेड़ काटे जा सकते हैं, जिससे इलाके के परितंत्र पर बुरा असर पड़ेगा।

परियोजना स्थल की निरीक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्माण कार्य के लिए जितनी वन भूमि का इस्तेमाल किया जा रहा है, उससे दोगुनी जमीन पर पेड़ लगाकर इसके असर को “कम” किया जा सकता है। लेकिन यह प्रस्ताव मध्य प्रदेश में बंजर हो चुकी वन भूमि पर पेड़ लगाने का है – जो प्रस्तावित परियोजना स्थल से लगभग 1,700 किलोमीटर दूर है।

वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के तहत, जब वन भूमि का इस्तेमाल गैर-वन कार्यों के लिए किया जाता है, तो उसी इलाके में पेड़ लगाने के लिए उतनी ही गैर-वन भूमि की पहचान करनी होती है। अगर ऐसी ज़मीन उपलब्ध न हो, तो इसके स्थान पर दूसरी जगह चुनी जा सकती है।

इस साल जून में तैयार की गई परियोजना की पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) रिपोर्ट के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश में गैर-वन भूमि उपलब्ध न होने के कारण, मध्य प्रदेश के 18 जिलों में 54,660 हेक्टेयर बंजर हो चुकी वन भूमि को ‘प्रतिपूरक वनीकरण’ के लिए चुना गया है।

राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (एनएचपीसी) लिमिटेड की ओर से अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी इलाके में प्रस्तावित परियोजना को पर्यावरण मंजूरी (ईसी) देने की सिफारिश, मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएसी) ने 31 अगस्त को हुई अपनी बैठक में की।

भाषा प्रशांत सुरेश

सुरेश


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