TS Singh Deo’s statement on the Jhiram Ghati verdict: ‘जिन दस लोगों को दोषी ठहराया गया, वे असल में ग्रामीण थे’, झीरम कांड पर पूर्व डिप्टी सीएम का बड़ा दावा

TS Singh Deo's statement on the Jhiram Ghati verdict: 'जिन दस लोगों को दोषी ठहराया गया, वे असल में ग्रामीण थे', झीरम कांड पर पूर्व डिप्टी सीएम का बड़ा दावा

TS Singh Deo’s statement on the Jhiram Ghati verdict: ‘जिन दस लोगों को दोषी ठहराया गया, वे असल में ग्रामीण थे’, झीरम कांड पर पूर्व डिप्टी सीएम का बड़ा दावा

TS Singh Deo's statement on the Jhiram Ghati verdict: 'जिन दस लोगों को दोषी ठहराया गया, वे असल में ग्रामीण थे', झीरम कांड पर पूर्व डिप्टी सीएम का बड़ा दावा /image: ANI

Modified Date: September 26, 2026 / 03:23 pm IST
Published Date: September 26, 2026 3:18 pm IST
HIGHLIGHTS
  • झीरम केस पर टीएस सिंहदेव का बड़ा दावा
  • राहुल गांधी से कानूनी मदद मांगे जाने की बात
  • दोषी ठहराए गए लोगों को ग्रामीण बताया

दिल्ली। TS Singh Deo’s statement on the Jhiram Ghati verdict: छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले में स्पेशल कोर्ट ने सभी 10 दोषियों को मौत की सज़ा सुनाई है। वहीं इस फैसले को लेकर कांग्रेस का कहना है कि जांच के नाम पर NIA ने सिर्फ खाना पूर्ति की। साजिश के एंगल की कोई जांच नहीं हुई है। इसी सिलसिले में आज पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव, मलकीत सिंह गैदु समेत कई कांग्रेस नेताओं ने लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की है।

मीटिंग के दौरान पीसीसी चीफ दीपक बैज ने प्रेजेंटेशन के जरिए NIA कोर्ट के फैसले को लेकर जानकारी दी राहुल गांधी को साझा की।

जिन लोगों को दोषी ठहराया गया, वे असल में ग्रामीण थे

वहीं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाक़ात के बाद कांग्रेस नेता टी.एस. सिंह देव ने कहा, “हमने उनके सामने बहुत अहम तथ्य रखे। एक बात यह थी कि जिन दस लोगों को दोषी ठहराया गया, वे असल में ग्रामीण थे। ऐसे लोग जो खाना पहुँचाने या गड्ढे खोदने जैसे काम करते थे, जबकि उन बड़े लोगों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिन्हें सिर्फ़ ‘भगोड़ा’ करार दिया गया था।

साज़िश वाले पहलू की बिल्कुल भी जाँच नहीं की

TS Singh Deo’s statement on the Jhiram Ghati verdict दूसरी बात, NIA ने साज़िश वाले पहलू की बिल्कुल भी जाँच नहीं की। उन्होंने पैराग्राफ 307 में नोट किया था कि नंदकुमार पटेल और उनके बेटों की पहचान के बारे में पूछताछ की गई थी, फिर भी जाँच उस बिंदु से ज़रा भी आगे नहीं बढ़ी। हमने उन्हें इस बारे में बताया और कानूनी राय के लिए मदद माँगी। उन्होंने हमें कानूनी मदद के लिए कुछ खास लोगों से सलाह लेने को कहा और संकेत दिया कि अगर हालात की ज़रूरत हुई तो पुलिस कस्टडी माँगने जैसे अगले कदमों पर विचार किया जा सकता है। राहुल गांधी ने सुरक्षा इंतज़ामों के बारे में भी खास जानकारी माँगी कि सुरक्षा कहाँ, कब और किस हद तक दी गई थी।

खत्म हो गई थी कांग्रेस की टॉप लीडरशिप (Chhattisgarh Jhiram Case)

साल 2013 के आखिर में छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने वाले थे। पिछले 2 बार से भाजपा की सरकार थी। 10 सालों से सत्ता से दूर कांग्रेस पूरा जोर लगाना चाह रही थी। कांग्रेस ने पूरे राज्य में परिवर्तन यात्रा निकालने का ऐलान किया। 25 मई 2013 को सुकमा जिले में परिवर्तन यात्रा का आयोजन हुआ। कार्यक्रम के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला सुकमा से जगदलपुर जा रहा था। 25 गाड़ियों में करीब 200 लोग थे। कांग्रेस नेता कवासी लखमा, नंदकुमार पटेल, दिनेश पटेल, महेन्द्र कर्मा, मलकीत सिंह गैदू और उदय मुदलियार समेत छत्तीसगढ़ कांग्रेस के लगभग सभी शीर्ष नेता काफिले में शामिल थे।

इस तरह से की गई थी 32 लोगों की हत्या (Jhiram Ghati Attack 2013)

NIA Jhiram Ghati Case शाम को 4 बजे काफिला जैसे ही झीरम घाटी से गुजरा, तभी नक्सलियों ने पेड़ गिराकर रास्ता रोक दिया और 200 से ज्यादा नक्सलियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। करीब डेढ़ घंटे तक गोलियां चलती रहीं। इसके बाद नक्सलियों ने एक-एक गाड़ी को चेक किया। जिन लोगों की सांसें चल रहीं थी उन्हें फिर से गोली मारी। जिंदा लोगों को बंधक बनाया। हमले में 32 से भी ज्यादा लोगों की मौत हुई। बताया जाता है कि नक्सलियों का मुख्य टारगेट बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा (Mahendra Karma Jhiram Attack) थे। इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि नक्सलियों ने कर्मा को करीब 100 गोलियां मारी थीं और चाकू से शरीर पूरी तरह छलनी कर दिया था। बताया जाता है कि नक्सलियों ने उनके शव पर चढ़कर डांस भी किया था।

ये भी पढ़ें


सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः

लेखक के बारे में

सवाल आपका है... 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई मीडिया संस्थानों में अपना योगदान दिया है. इन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर की डिग्री ली है.