पश्चिम एशिया में संघर्ष में इस साल 16 भारतीयों की मौत, 75 घायल: सरकार
पश्चिम एशिया में संघर्ष में इस साल 16 भारतीयों की मौत, 75 घायल: सरकार
नयी दिल्ली, 31 जुलाई (भाषा) सरकार ने बताया कि पश्चिम एशिया में इस साल संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 10 नाविकों समेत 16 भारतीय नागरिकों की मौत हुई है, जबकि 75 अन्य घायल हुए हैं।
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा को माकपा सांसद जॉन ब्रिटास के सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उनसे पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण मारे गए, घायल हुए, फंसे या निकाले गए भारतीय नाविकों और अन्य भारतीय नागरिकों की संख्या के बारे में पूछा गया था।
सिंह ने कहा, ‘‘वर्ष 2026 में पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से इस क्षेत्र में 10 नाविकों समेत 16 भारतीय नागरिकों की मौत हुई है। इनमें सऊदी अरब में एक, कुवैत में दो, ओमान में आठ, इराक में एक और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में जान गंवाने वाले चार भारतीय शामिल हैं।’’
उन्होंने बताया कि इस संघर्ष में 75 भारतीय नागरिक घायल हुए हैं, जिनमें यूएई में 32, ओमान में 24, कतर में चार, कुवैत मे 13, सऊदी अरब और इजराइल में घायल हुआ एक-एक नागरिक शामिल हैं।
मंत्री ने कहा कि हमलों से अलग कतर के रास लाफान गैस संयंत्र में हुई एक दुर्घटना में भी 12 भारतीय नागरिकों की मौत हुई थी।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि सरकार ने संबंधित देशों की सरकारों के साथ समन्वय कर मृत भारतीय नागरिकों के परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई और उनके पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत लाने की व्यवस्था की। घायल भारतीयों का स्थानीय अस्पतालों में इलाज कराया गया।
सिंह ने कहा कि भारतीय दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों ने स्थानीय प्रशासन और अस्पतालों के साथ संपर्क बनाए रखा तथा घायलों के स्वास्थ्य की जानकारी ली। इसके अलावा परिवारों से संपर्क कराने, यात्रा विकल्पों की जानकारी देने और सुरक्षित भारत वापसी में भी सहायता की गई।
उन्होंने बताया कि युद्ध क्षेत्र से जुड़ी सभी घटनाओं में डीजीएमए कल्याण योजना (नाविक कल्याण कोष सोसायटी-एसडब्ल्यूएफएस) के तहत 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाती है। आवश्यक जांच और सत्यापन के बाद यह राशि प्रभावित नाविकों के परिजनों को जल्द उपलब्ध कराई जाती है।
मंत्री ने कहा कि संबंधित यूनियनों के साथ हुए सामूहिक समझौतों के तहत आने वाले नाविकों को अतिरिक्त युद्ध क्षेत्र मुआवजा भी मिलता है। अधिकारियों के लिए भारतीय समुद्री संघ की ओर से 12 लाख रुपये और चालक दल के सदस्यों के लिए भारतीय नाविक संघ की ओर से 10 लाख रुपये दिए जाते हैं।
एक अन्य सवाल के लिखित जवाब में विदेश राज्य मंत्री ने बताया कि फरवरी 2026 में पश्चिम एशिया (पश्चिम एशिया) में संघर्ष शुरू होने के बाद तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने ईरान से 2,557 भारतीय नागरिकों को सीमा पार कर आर्मेनिया और अजरबैजान पहुंचाने में मदद की, जहां से वे भारत लौट सके।
उन्होंने कहा कि सरकार के अनुमान के अनुसार ईरान में करीब 7,000 भारतीय नागरिक रह रहे हैं, जिनमें धार्मिक अध्ययन करने वाले छात्र, मेडिकल छात्र, कामगार, नाविक और मछुआरे शामिल हैं।
सिंह ने बताया कि संघर्ष के कारण भारत लौटे, ईरान में अध्ययनरत भारतीय मेडिकल छात्रों की समस्याओं को ईरानी अधिकारियों के समक्ष उठाया गया है और स्थिति के समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, ईरान जाने के इच्छुक भारतीय नागरिकों को स्थिति सामान्य होने तक अपनी यात्रा टालने की सलाह दी गई है।
एक अन्य प्रश्न के जवाब में मंत्री ने बताया कि भारतीय मिशन दुबई स्थित ईरानी अस्पताल को बंद किए जाने के कारण प्रभावित हुए 130 से अधिक भारतीय नागरिकों से संपर्क बनाए हुए है और उन्हें हरसंभव सहायता दी जा रही है।
मंत्री ने कहा कि इस मामले को राजनयिक माध्यमों से स्थानीय अधिकारियों के समक्ष भी उठाया गया है। हालांकि, वीजा से जुड़े फैसले किसी भी देश के संप्रभु अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
एक अन्य सवाल के जवाब में सिंह ने बताया कि अमेरिका के सीमा सुरक्षा अधिकारियों ने ‘ऑपरेशन चेकमेट’ के तहत 52 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें 30 भारतीय नागरिक शामिल थे।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा (सीबीपी) द्वारा एक जून 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, 11 से 15 मई 2026 के बीच एरिजोना राज्य में अमेरिकी सीमा गश्ती दल ने कथित रूप से अवैध रूप से अमेरिका में रहने वाले 52 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें से 36 लोग भारी ट्रक चला रहे थे।
सिंह के अनुसार, अमेरिका के बयान से संकेत मिलता है कि इनमें से 30 भारतीय नागरिक थे, जिन्हें अमेरिकी संघीय कानून के तहत प्रक्रिया पूरी करने के बाद निर्वासित किया जाना था।
उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन चेकमेट’ अमेरिकी अधिकारियों की कार्रवाई थी और विदेश मंत्रालय को इसकी पहले से कोई जानकारी नहीं थी। हालांकि, भारतीय नागरिकों की गिरफ्तारी की खबर सामने आने के तुरंत बाद वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास के माध्यम से अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क किया गया और संबंधित लोगों के नाम, विवरण तथा अन्य जानकारी मांगी गई है। भारत सरकार अमेरिकी सीबीपी से इन व्यक्तियों की पहचान और अन्य विवरण की पुष्टि का इंतजार कर रही है।
भाषा मनीषा माधव
माधव

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