नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) सरकार ने सोमवार को राज्यसभा को बताया कि विभिन्न विमानन कंपनियों द्वारा संचालित 176 विमानों में ‘‘फ्लाइट डेटा’’ या ‘‘कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर’’ नहीं हैं।
नियमों के अनुसार, 5,700 किलोग्राम से कम भार वाले विमानों के लिए अनिवार्य रूप से ‘‘कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर’’ (सीवीआर) आवश्यक है, बशर्ते उन्हें एक जनवरी, 2016 के बाद उड़ान योग्यता प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ हो।
नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि एक जनवरी, 2016 से पहले कुल 2,263 विमान पंजीकृत किए गए थे और उन्हें उड़ान योग्यता प्रमाण पत्र जारी किए गए थे।
मोहोल ने कहा कि विभिन्न परिचालकों द्वारा संचालित 176 विमान ऐसे हैं जिनमें ‘‘फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर’’ (एफडीआर) या ‘‘कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर’’ (सीवीआर) नहीं लगे हैं।
उनसे सवाल किया गया था कि क्या सरकार के पास बिना ‘‘कॉकपिट वॉयस’’ और ‘‘फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर’’ वाले विमानों की संख्या के आंकड़े हैं?
पिछले महीने झारखंड में दुर्घटनाग्रस्त हुए करीब 40 साल पुराने बीचक्राफ्ट सी90ए विमान में ‘‘कॉकपिट वॉयस’’ या ‘‘फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर’’ नहीं था। उस दुर्घटना में सात लोगों की मौत हो गई थी।
मंत्री ने अपने जवाब में यह भी कहा कि पिछले पांच वर्षों में एअर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के एक-एक विमान उड़ान योग्यता प्रमाणपत्र की आवश्यकताओं का उल्लंघन करते पाए गए।
उन्होंने कहा कि जांच के बाद, नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने प्रवर्तन कार्रवाई की, जिसमें संगठनों पर जुर्माना लगाना, विमान रखरखाव इंजीनियर का लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित करना शामिल है।
इस बीच, मंत्री ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि पिछले तीन वर्षों में विभिन्न भारतीय विमानन कंपनियों के विमानों में 1,244 तकनीकी खराबी दर्ज की गई हैं।
मंत्री द्वारा पेश आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष कुल 93 अभद्र यात्रियों को ‘नो-फ्लाई लिस्ट’ में डाला गया। 2024 में यह संख्या 82 और 2023 में 110 थी।
भाषा अविनाश माधव
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