जम्मू में परेड सब्जी मंडी की 20 दुकानें ढहाई गईं, व्यापारियों ने किया विरोध
जम्मू में परेड सब्जी मंडी की 20 दुकानें ढहाई गईं, व्यापारियों ने किया विरोध
जम्मू, नौ अगस्त (भाषा) जम्मू शहर की पारंपरिक परेड सब्जी मंडी में रविवार तड़के करीब 20 दुकानों को ढहा दिया गया।
इस कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों ने प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि जम्मू नगर निगम (जेएमसी) ने उन्हें पहले से कोई सूचना नहीं दी और न ही सामान हटाने के लिए पर्याप्त समय दिया।
अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई जेएमसी की 5.88 करोड़ रुपये की स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत भीड़भाड़ वाले पुराने शहर में पारंपरिक सब्जी मंडी के आधुनिकीकरण और व्यापक पुनर्विकास की योजना का हिस्सा है।
पुनर्विकास परियोजना की आधारशिला 22 जून को रखी गई थी। इसका उद्देश्य मंडी के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाना और व्यापारियों तथा ग्राहकों के लिए अधिक व्यवस्थित एवं सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना है।
अधिकारियों के अनुसार, जेएमसी का एक दल पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के साथ सुबह करीब सात बजे मंडी पहुंचा और करीब 20 अस्थायी तथा पक्की दुकानों को ढहा दिया।
कार्रवाई के तरीके को लेकर हालांकि व्यापारियों में भारी नाराजगी है।
परेड सब्जी मंडी के सब्जी एवं फल संघ के अध्यक्ष सुभाष चंद्र शर्मा ने आरोप लगाया कि व्यापारियों के साथ बातचीत चल रही थी और उनकी ओर से बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद अधिकारियों ने ‘‘मनमाने’’ तरीके से यह कार्रवाई की।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हम आधुनिकीकरण के खिलाफ नहीं हैं और प्रशासन के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं, बशर्ते मंडी का उचित तरीके से पुनर्निर्माण किया जाए। दिल्ली, चंडीगढ़ और पंजाब की मंडियों की तरह यहां व्यापारियों और ग्राहकों के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए।’’
शर्मा ने पुनर्विकसित मंडी में प्रस्तावित आवागमन की जगह पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल छह फुट चौड़े रास्ते होने से सब्जी व्यापारियों के लिए मंडी के अंदर माल लाना बेहद मुश्किल होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘ये व्यापारी सब्जियां किलोग्राम में नहीं लाते। वे पांच क्विंटल, 10 क्विंटल, एक टन या यहां तक कि दो टन सब्जियां लेकर आते हैं। अगर केवल छह फुट का रास्ता दिया जाएगा तो वे सब्जियां मंडी के अंदर कैसे लाएंगे?’’
संघ के अध्यक्ष ने कहा कि दुकानों को ढहाने से पहले अधिकारियों को प्रभावित व्यापारियों के पुनर्वास और स्थानांतरण की उचित योजना तैयार करनी चाहिए थी।
उन्होंने कहा, ‘‘ये गरीब लोग हैं, जो रोजाना 400 से 500 रुपये कमाते हैं। उनके परिवार हैं। वे कहां जाएंगे? कहां बैठकर अपना रोजगार चलाएंगे?’’
व्यापारियों ने आरोप लगाया कि ध्वस्तीकरण दल सुबह बहुत जल्दी पहुंच गया, जब अधिकांश दुकानदार घरों पर थे और रविवार होने के कारण मंडी खुली भी नहीं थी।
दुकानदारों के अनुसार, उन्हें दुकानों को ढहाए जाने के संबंध में औपचारिक रूप से कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी।
व्यापारियों ने दावा किया कि ध्वस्तीकरण शुरू होने के समय कई दुकानों में सामान मौजूद था, जिससे उन्हें काफी नुकसान हुआ।
कुछ दुकानदारों ने कहा कि दुकानों को ढहाने की कार्रवाई के खिलाफ अदालत से प्राप्त स्थगन आदेश पर भी जेएमसी ने ध्यान नहीं दिया।
व्यापारियों ने कहा कि इनमें से कुछ दुकानें करीब 100 साल पुरानी थीं और कई पीढ़ियों से परिवारों की आजीविका का साधन बनी हुई थीं।
एक अन्य प्रदर्शनकारी अजय कुमार ने कहा, ‘‘अगर ये ढांचे असुरक्षित थे तो अधिकारियों को पहले कार्रवाई करनी चाहिए थी और व्यापारियों के लिए व्यवस्था करनी चाहिए थी। आप सुबह-सुबह आकर उन दुकानों को नहीं ढहा सकते, जहां लोगों की पूरी आजीविका निर्भर है।’’
व्यापारियों ने कहा कि वे आधुनिकीकरण परियोजना के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन चाहते हैं कि प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि पुनर्विकास उनकी आजीविका की कीमत पर न हो।
भाषा रवि कांत रवि कांत नरेश
नरेश

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