एसआईआर के लिए झारखंड और ओडिशा से 200 न्यायिक अधिकारी आएंगे पश्चिम बंगाल

एसआईआर के लिए झारखंड और ओडिशा से 200 न्यायिक अधिकारी आएंगे पश्चिम बंगाल

एसआईआर के लिए झारखंड और ओडिशा से 200 न्यायिक अधिकारी आएंगे पश्चिम बंगाल
Modified Date: February 26, 2026 / 08:45 pm IST
Published Date: February 26, 2026 8:45 pm IST

कोलकाता, 26 फरवरी (भाषा) मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के लिए झारखंड और ओडिशा से करीब 200 न्यायिक अधिकारियों के जल्द ही पश्चिम बंगाल आने की संभावना है। निर्वाचन आयोग के विशेष सूची पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

गुप्ता ने कहा कि अधिकारियों के कार्यभार ग्रहण करने की जानकारी जल्द ही निर्वाचन आयोग को दे दी जाएगी। उच्चतम न्यायालय द्वारा कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल को दिए गए सुझाव के बाद यह कदम उठाया जा रहा है।

गुप्ता ने मुख्य न्यायाधीश पॉल द्वारा बुलाई गई समीक्षा बैठक में शामिल होने के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम इस प्रक्रिया के लिए न्यायिक अधिकारियों के प्रशिक्षण की सभी व्यवस्थाएं करेंगे।’’

उच्चतम न्यायालय के निर्देश के अनुसार, पश्चिम बंगाल की अधीनस्थ अदालतों के न्यायिक अधिकारियों को उन व्यक्तियों के दावों और आपत्तियों के संबंध में निर्णय के लिए तैनात किया गया है, जिनके नाम तार्किक विसंगतियों की सूची में शामिल हैं और जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का खतरा है।

‘‘तार्किक विसंगति’’ श्रेणी के तहत मतदाता के माता-पिता के नाम का मिलान न होने और उसके एवं उसके माता-पिता की उम्र में 15 साल से कम या 50 साल से अधिक आयु जैसी बातों को शामिल किया गया है।

उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों की एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 80 लाख दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए 250 जिला न्यायाधीशों के अलावा दीवानी न्यायाधीशों की तैनाती और पड़ोसी राज्यों झारखंड एवं ओडिशा से न्यायिक अधिकारियों को बुलाने की 24 फरवरी को अनुमति दी थी।

शीर्ष अदालत ने न्यायमूर्ति पॉल के 22 फरवरी के उस पत्र का संज्ञान लिया, जिसमें कहा गया था कि एसआईआर कवायद के लिए तैनात 250 जिला न्यायाधीशों को दावों और आपत्तियों का निपटारा करने में लगभग 80 दिन लगेंगे।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज अग्रवाल ने कहा कि कुछ गड़बड़ियों को छोड़कर निर्णय संबंधी काम सुचारु रूप से जारी हैं। उन्होंने इन गड़बड़ियों को ‘‘शुरुआत में आने वाली समस्याएं’’ बताया।

उन्होंने कहा कि करीब 270 न्यायिक अधिकारियों ने पहले ही काम संभाल लिया है, जबकि पड़ोसी राज्यों से आने वाले अधीनस्थ अदालतों के 200 अन्य न्यायाधीश भी जल्द ही इसमें शामिल होंगे।

अग्रवाल ने कहा, ‘‘उनके लिए बुनियादी ढांचे से जुड़ी आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है।’’

भाषा

सिम्मी पवनेश

पवनेश


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