मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में खाद्य विषाक्तता से 200 तोतों की मौत

मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में खाद्य विषाक्तता से 200 तोतों की मौत

मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में खाद्य विषाक्तता से 200 तोतों की मौत
Modified Date: January 2, 2026 / 01:41 pm IST
Published Date: January 2, 2026 1:41 pm IST

खरगोन, दो जनवरी (भाषा) मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में नर्मदा नदी के किनारे खाद्य विषाक्तता के कारण कम से कम 200 तोतों की मौत हो गई है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि बीते चार दिनों में बड़वाह क्षेत्र में नर्मदा नदी पर बने एक्वाडक्ट पुल के पास तोते मृत मिले हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बर्ड फ्लू की आशंका से इनकार किया गया है।

जिला वन्यजीव वार्डन टोनी शर्मा ने बताया कि बचाव कार्य के दौरान कुछ तोते जीवित पाए गए थे लेकिन भोजन में मौजूद विषाक्तता इतनी अधिक थी कि वे कुछ ही देर बाद मर गए।

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तोतों की मौत से इलाके में बर्ड फ्लू को लेकर दहशत फैल गई , हालांकि पशु चिकित्सा परीक्षण में संक्रमण के कोई लक्षण नहीं मिले। वन विभाग ने एहतियात के तौर पर एक्वाडक्ट पुल के आसपास पक्षियों को भोजन कराने पर प्रतिबंध लगा दिया है और वहां निगरानी के लिए कर्मचारियों की तैनाती की गई है।

अधिकारियों ने बताया कि मृत पक्षियों के विसरा के नमूने आगे की जांच के लिए जबलपुर भेजे गए हैं।

पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, खाद्य विषाक्तता और अनुचित आहार के कारण तोतों की मौत हुई है। स्थानीय लोगों की सूचना पर बीते चार दिनों से पशु चिकित्सा विभाग, वन विभाग और वन्यजीव शाखा की टीमें क्षेत्र की निगरानी कर रही हैं।

पोस्टमार्टम करने वाली पशु चिकित्सक डॉ. मनीषा चौहान ने बताया कि तोतों में ‘फूड पॉइजनिंग’ के लक्षण पाए गए हैं और बर्ड फ्लू से जुड़ा कोई संकेत नहीं मिला।

उन्होंने कहा कि लोग अक्सर अनजाने में पक्षियों को ऐसा भोजन खिला देते हैं जो उनके पाचन तंत्र के लिए घातक साबित होता है।

पशु चिकित्सा विस्तार अधिकारी डॉ. सुरेश बघेल ने बताया कि मृत तोतों के पेट में चावल और छोटे कंकड़ पाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि प्राथमिक तौर पर मौतें अनुचित भोजन से जुड़ी प्रतीत होती हैं। इसमें कीटनाशक छिड़के गए खेतों में दाना चुगने और नर्मदा नदी के पानी के सेवन जैसे कारण भी शामिल हो सकते हैं।

अधिकारियों ने बताया कि पुल पर आने वाले पर्यटकों द्वारा पक्षियों को पकाया हुआ या बचा हुआ भोजन खिलाना भी मौत का कारण बन सकता है।

भाषा सं दिमो मनीषा

मनीषा


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