ज्ञान को एकीकृत करने की क्षमता वाले युवाओं का रहेगा 21वीं सदी में बोलबाला: मनोज सिन्हा

ज्ञान को एकीकृत करने की क्षमता वाले युवाओं का रहेगा 21वीं सदी में बोलबाला: मनोज सिन्हा

ज्ञान को एकीकृत करने की क्षमता वाले युवाओं का रहेगा 21वीं सदी में बोलबाला: मनोज सिन्हा
Modified Date: July 31, 2026 / 04:19 pm IST
Published Date: July 31, 2026 4:19 pm IST

जम्मू, 31 जुलाई (भाषा) जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शुक्रवार को कहा कि 21वीं सदी में उन युवाओं का बोलबाला रहेगा जो विभिन्न विषयों के ज्ञान को एकीकृत कर सकते हैं और जटिल चुनौतियों के नए एवं नवोन्मेषी समाधान खोज सकते हैं।

उन्होंने यह बात ‘क्लस्टर विश्वविद्यालय’ जम्मू में शैक्षणिक कार्यक्रमों की एक श्रृंखला का उद्घाटन करते हुए की। सिन्हा ने कहा कि आज की दुनिया किसी एक विषय तक सीमित विशेषज्ञों के बजाय बहुविषयक विचारकों की मांग करती है।

यहां लोक भवन में विश्वविद्यालय के ‘‘डिजाइन योर डिग्री’’ कार्यक्रम और अन्य शैक्षणिक पहलों की शुरुआत करने के बाद सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना ​​है कि 21वीं सदी में उन युवाओं का बोलबाला रहेगा जो केवल एक विषय के विशेषज्ञ नहीं हैं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों के ज्ञान को एकीकृत कर सकते हैं और नए समाधान खोज सकते हैं।’’

उपराज्यपाल ने कहा, ‘‘भविष्य उनका है जो सीमाओं को नहीं, बल्कि संभावनाओं को पहचानते हैं। यह पहल छात्रों को अपनी रुचि, प्रतिभा और आकांक्षाओं के अनुसार विषयों को चुनने और अपनी शैक्षणिक यात्रा को स्वयं आकार देने में सक्षम बनाती है।’’

उन्होंने कहा कि ज्ञान की सीमाएं बढ़ रही हैं और समाज के सामने आने वाली समस्याएं बहुआयामी हैं, जिनके सार्थक समाधान के लिए बहुविषयक दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

सिन्हा ने भौतिकी, रसायन विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित और भूगोल में एकीकृत कार्यक्रमों का उद्घाटन करते हुए कहा कि ऐसे पाठ्यक्रम जटिल मुद्दों का समाधान करने में सक्षम समग्र शोधकर्ताओं को विकसित करने में मदद करेंगे।

जलवायु परिवर्तन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को समझने के लिए रसायन विज्ञान, भौतिकी, गणित और भूगोल सहित कई विषयों के योगदान की आवश्यकता है।

विश्वविद्यालय ने सनातन धर्म और भारतीय ज्ञान प्रणाली में एक वर्षीय स्नातकोत्तर डिप्लोमा भी शुरू किया है और वैदिक अध्ययन विभाग की स्थापना की है।

सिन्हा ने कहा कि शिक्षा को वैज्ञानिक प्रगति के साथ-साथ भारत की बौद्धिक विरासत के मूल्यों और ज्ञान के बीच संतुलन बनाना चाहिए।

उपराज्यपाल ने आईआईटी मद्रास के सहयोग से सेमीकंडक्टर कौशल विकास कार्यक्रम का भी उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि यह भारत की प्रौद्योगिकी आकांक्षाओं के अनुरूप छात्रों को अत्याधुनिक विशेषज्ञता से लैस करेगा।

भाषा खारी नरेश

नरेश


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