पंजाब में दो दशक तक बंधुआ मजदूर रहने के बाद तमिलनाडु का व्यक्ति अपनी मां से दोबारा मिला

पंजाब में दो दशक तक बंधुआ मजदूर रहने के बाद तमिलनाडु का व्यक्ति अपनी मां से दोबारा मिला

पंजाब में दो दशक तक बंधुआ मजदूर रहने के बाद तमिलनाडु का व्यक्ति अपनी मां से दोबारा मिला
Modified Date: July 31, 2026 / 08:34 pm IST
Published Date: July 31, 2026 8:34 pm IST

पटियाला (पंजाब), 31 जुलाई (भाषा) पंजाब में दो दशक तक कथित तौर पर बंधुआ मजदूर के रूप में काम करने वाला तमिलनाडु का युवक 23 साल बाद अपनी 68 वर्षीय मां से दोबारा मिल सका। युवक को पंजाब में कथित बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराए जाने के बाद पटियाला में यह पुनर्मिलन संभव हो सका। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

पटियाला के उपायुक्त डॉ. हिमांशु अग्रवाल ने बताया कि प्रकाश को वर्ष 2022 में अमृतसर जिले के एक डेरी फार्म से बचाया गया था, जहां उसने कथित तौर पर लगभग दो दशक तक बंधुआ मजदूर के रूप में काम किया।

उन्होंने बताया कि कानूनी औपचारिकताएं और पहचान का सत्यापन पूरा होने के बाद प्रकाश को उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया गया।

उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन ने श्रम एवं सामाजिक सुरक्षा तथा महिला एवं बाल विकास विभागों को निर्देश दिया है कि प्रकाश को मुआवजा और पुनर्वास से जुड़े सभी लाभ उपलब्ध कराए जाएं।

उन्होंने बताया कि प्रकाश को कथित तौर पर बंधुआ मजदूरी में रखने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के भी निर्देश दिए गए हैं।

पटियाला के लचकनी गांव स्थित ‘अपना फर्ज सेवा सोसाइटी’ के आश्रय गृह में प्रकाश की मां आर. सुंदरी ने दो दशक से अधिक समय बाद अपने बेटे को गले लगाया।

अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2003 में 16 वर्षीय प्रकाश अपने छोटे भाई से कहासुनी के बाद घर छोड़कर चला गया था और उसके बाद लापता हो गया।

परिवार ने प्रकाश को तलाशने की काफी कोशिश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका। अंततः परिजनों ने उसे मृत मान लिया। प्रकाश के पिता का वर्ष 2021 में कैंसर से निधन हो गया और उन्हें अपने बेटे का कोई सुराग नहीं मिल सका।

गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के अनुसार, प्रकाश अज्ञात परिस्थितियों में पंजाब पहुंचा था और अमृतसर के जसरौर गांव स्थित एक डेरी फार्म में लगभग दो दशक तक कथित रूप से बंधुआ मजदूर के रूप में काम करता रहा। वर्ष 2022 में उसे वहां से मुक्त कराया गया।

इसके बाद प्रकाश को पटियाला स्थित एनजीओ के आश्रय गृह में रखा गया, जहां शुरुआत में वह मानसिक आघात और स्मृति लोप की समस्या से जूझ रहा था। धीरे-धीरे उसकी याददाश्त लौटने लगी और उसे अपने पैतृक गांव का नाम याद आया, जिसके आधार पर स्वयंसेवकों ने उसके परिवार का पता लगाया।

प्रकाश के परिवार की तलाश करने में हरियाणा विधानसभा के सेवानिवृत्त सचिव सुभाष चंद्र और तमिलनाडु के पत्रकार मुथैया ने भी सहयोग किया। उन्होंने राज्यभर में व्यापक खोजबीन के बाद प्रकाश की मां का पता लगाया।

पुनर्मिलन से पहले तमिलनाडु के अधिकारियों ने स्कूल के दस्तावेजों, राशन कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों के आधार पर प्रकाश की पहचान का सत्यापन किया।

प्रकाश के छोटे भाई ने पंजाब पहुंचकर उसकी पहचान की। पहचान की पुष्टि के बाद कोयंबटूर और पटियाला जिला प्रशासन ने समन्वय कर प्रकाश की सुरक्षित घर वापसी और पुनर्वास की व्यवस्था की, जिसके बाद 23 वर्षों के लंबे इंतजार का अंत हुआ और प्रकाश का परिवार से पुनर्मिलन संभव हो सका।

भाषा शफीक नरेश

नरेश


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