नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई बाढ़ में 290 भारतीय लापता, 200 फंसे

नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई बाढ़ में 290 भारतीय लापता, 200 फंसे

नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई बाढ़ में 290 भारतीय लापता, 200 फंसे
Modified Date: August 27, 2026 / 10:46 pm IST
Published Date: August 27, 2026 10:46 pm IST

(फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ के बाद कम से कम 290 भारतीय अब भी लापता हैं, जबकि लगभग 200 अन्य चीन की ओर फंसे हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

मंत्रालय ने कहा कि भारत दोनों देशों के अधिकारियों के लगातार संपर्क में है, ताकि बचाव अभियान में समन्वय किया जा सके।

इसने कहा कि बचाव अभियान में तेजी आने के साथ भारत नेपाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और संकट से निपटने में उसकी मदद कर रहा है।

नेपाल में बुधवार को अचानक आई बाढ़ ने तीन जिलों में भारी तबाही मचाई है। बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 359 हो गई।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शीर्ष अधिकारियों तथा काठमांडू और बीजिंग में भारत के राजदूतों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद कहा कि भारत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीयों की स्थिति का पता लगाने के लिए “पुरजोर प्रयास” कर रहा है।

भारत ने बुधवार रात से दो सैन्य परिवहन विमानों के जरिए कुल 47.5 टन आपातकालीन राहत सामग्री नेपाल भेजी है और अधिक राहत सामग्री भेजने की प्रक्रिया जारी है।

एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि भारत की तत्काल प्राथमिकता लापता भारतीयों का पता लगाना और उन्हें बचाना तथा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस वार्ता में कहा कि नेपाल में लापता भारतीयों में जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले लोग और तमिलनाडु तथा पश्चिम बंगाल समेत विभिन्न राज्यों के पर्यटक समूह शामिल हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘290 भारतीय नागरिकों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। इनमें वे 73 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, जो त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में काम कर रहे थे। काठमांडू स्थित हमारा दूतावास इन लोगों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए परियोजना प्रमुख के संपर्क में है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा, तमिलनाडु के 37 और 49 भारतीय नागरिकों के दो अलग-अलग समूह हैं, जो सम्राट और फ्लाई एवरेस्ट ट्रैवल एजेंसियों के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए थे।’’

जायसवाल ने कहा कि पश्चिम बंगाल के 32 भारतीय नागरिकों का एक अलग समूह भी था, जो सम्राट ट्रैवल्स की मदद से रसुवा जिले के तिमुरे गया था। उन्होंने कहा कि वहीं, कुछ अन्य राज्यों के 61 भारतीय नागरिकों का एक और समूह भी था।

उन्होंने कहा कि केरल के 33 भारतीय नागरिकों का एक और समूह भी था।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिकों को बचा लिया है… हमें जानकारी मिली है कि मानसरोवर यात्रा पर गए कई भारतीय नागरिक चीन के क्षेत्र में फंसे हुए हैं।’’

जायसवाल ने कहा कि तिब्बत की ओर फंसे लगभग 200 भारतीय नागरिकों ने सुरक्षित निकाले जाने के लिए सहायता मांगी है।

उन्होंने कहा कि इनमें से 95 लोग गारचेन में हैं और नेपाल में प्रवेश करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं, जबकि चार लोग जिलॉन्ग शहर में और 13 लोग जुतुलपुक में हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि बाढ़ से तबाह हुए क्षेत्रों में स्थिति लगातार बदल रही है और भारत भारतीय नागरिकों को बचाने के लिए संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है।

उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करने के बाद जयशंकर ने कहा, ‘‘बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सभी भारतीयों की स्थिति का पता लगाने के लिए तत्काल प्रयास किए जा रहे हैं।”

जयशंकर ने कहा कि उनका मंत्रालय विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों, टूर ऑपरेटर और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘हम इस मामले के साथ-साथ राहत प्रयासों को लेकर भी नेपाली पक्ष के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।’’

जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा, “एक दूसरी उड़ान रवाना हुई है, जिसमें नेपाल के लिए 37.5 टन राहत सामग्री, दवाइयां और खाद्य पैकेट भेजे गए हैं।”

उन्होंने कहा, ‘‘भारत नेपाली अधिकारियों के साथ लगातार और करीबी संपर्क में है। हम जारी राहत प्रयासों को मजबूती से समर्थन देते रहेंगे।’’

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को नेपाल के अपने समकक्ष बालेंद्र शाह से बात की थी और वहां बाढ़ से जान-माल के नुकसान पर संवेदना व्यक्त की थी। साथ ही, उन्होंने कहा था कि भारत पड़ोसी देश को हरसंभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है।

मोदी ने कहा था कि भारत के लोग इस कठिन समय में नेपाल के अपने भाइयों और बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं।

भाषा

देवेंद्र सुभाष

सुभाष


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