वीवीपी-द्वितीय कार्यक्रम के तहत नेपाल सीमा पर विकसित किए जाएंगे लखीमपुर खीरी के 47 गांव

Ads

वीवीपी-द्वितीय कार्यक्रम के तहत नेपाल सीमा पर विकसित किए जाएंगे लखीमपुर खीरी के 47 गांव

  •  
  • Publish Date - March 15, 2026 / 01:33 PM IST,
    Updated On - March 15, 2026 / 01:33 PM IST

लखीमपुर खीरी (उप्र), 15 मार्च (भाषा) नेपाल की सीमा से सटे लखीमपुर खीरी जिले के 47 गांवों को केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2’ (वीवीपी-द्वितीय) के तहत सीमा पर ‘प्रथम ग्राम’ के रूप में विकसित किया जाएगा।

इन गांवों में हर मौसम में चलने लायक सड़क सम्पर्क मार्ग, दूरसंचार सम्पर्क और ऑन-ग्रिड बिजली की सुविधा होंगी ताकि वे सीमा सुरक्षा के लिए ‘आंख और कान’ के रूप में काम कर सकें।

लखीमपुर खीरी की जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने रविवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘सीमा की सुरक्षा और उसका विकास साथ-साथ चलने चाहिए। ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2’ के जरिये हम इन 47 गांवों में बुनियादी ढांचे और आजीविका के अवसरों को मजबूत कर रहे हैं ताकि इन गांवों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाया जा सके और सीमावर्ती समुदायों को सशक्त, समृद्ध और अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ बनाया जा सके।’’

उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य बुनियादी ढांचे का विकास करना, सीमा-विशिष्ट जनसंपर्क गतिविधियां चलाना और पर्यटन, सांस्कृतिक विरासत और कौशल विकास को बढ़ावा देकर बेहतर आजीविका के अवसर पैदा करना है।

जिलाधिकारी ने बताया कि इसके अलावा इस पहल का उद्देश्य स्थानीय स्वयं सहायता समूहों, सहकारी समितियों, युवाओं और महिलाओं को भी मजबूत बनाना है।

जिला सांख्यिकी अधिकारी अरविंद वर्मा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि इन 47 सीमावर्ती गांवों में पलिया तहसील के 18 और निघासन तहसील के 29 गांव शामिल हैं।

वर्मा ने कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश का योजना विभाग वीवीपी-द्वितीय के कार्यान्वयन का समन्वय करेगा। इस कार्यक्रम में बलरामपुर, श्रावस्ती, महाराजगंज, पीलीभीत, बहराइच और खीरी ज़िलों के वे सभी सीमावर्ती गांव शामिल हैं जो नेपाल से सटे हुए हैं। इस कार्यक्रम का उचित कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक जिला स्तरीय समिति का गठन किया गया है।’’

इस बीच, अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश के योजना विभाग ने कुछ दिन पहले संबंधित जिलाधिकारियों के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंस माध्यम से राज्य में वीवीपी-द्वितीय के कार्यान्वयन से जुड़े प्रस्तावों और परियोजनाओं पर चर्चा की थी।

उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय के अनुसार, ‘सुरक्षित, संरक्षित और जीवंत भूमि सीमाओं’ के लिए ‘विकसित भारत ऐट 2047’ के दृष्टिकोण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने दो अप्रैल 2025 को ‘वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम-2’ (वीवीपी-द्वितीय) को एक ‘केंद्रीय क्षेत्र योजना’ के रूप में मंजूरी दी है।

अधिकारियों के मुताबिक इस योजना के तहत, वित्तीय वर्ष 2028-29 तक 6,839 करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया गया है और इसके जरिए उन ब्लॉक में स्थित गांवों का व्यापक विकास करना है जो अंतरराष्ट्रीय भू-सीमाओं से सटे हैं।

उन्होंने बताया कि इसमें उत्तरी सीमा शामिल नहीं है क्योंकि वह पहले से ही वीवीपी-प्रथम के अंतर्गत आती है।

अधिकारियों के अनुसार इस कार्यक्रम को अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, गुजरात, जम्मू कश्मीर, लद्दाख, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के चुनिंदा रणनीतिक गांवों में लागू किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य जीवन की स्थितियों को बेहतर बनाना और रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा करना है, ताकि सीमाओं को समृद्ध और सुरक्षित बनाया जा सके, सीमा-पार होने वाले अपराधों पर नियंत्रण पाया जा सके, सीमावर्ती आबादी को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके और उनमें ‘सीमा सुरक्षा बलों की आंख और कान’ के रूप में कार्य करने की भावना विकसित की जा सके जो कि आंतरिक सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भाषा सं सलीम सुरभि

सुरभि