ओडिशा के अंगुल में कोयला खनन के लिए 750 हेक्टेयर वन भूमि का इस्तेमाल होने की संभावना

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ओडिशा के अंगुल में कोयला खनन के लिए 750 हेक्टेयर वन भूमि का इस्तेमाल होने की संभावना

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  • Publish Date - July 17, 2026 / 06:06 PM IST,
    Updated On - July 17, 2026 / 06:06 PM IST

(अलिंद चौहान)

नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) ओडिशा के अंगुल जिले में 750 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि का इस्तेमाल रुंगटा सन्स प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित अलकनंदा कोयला खदान में खनन के लिए किया जा सकता है।

यह खनन स्थल सिमलीपाल-सतकोसिया गॉर्ज बाघ गलियारे से करीब 4.9 किलोमीटर और संबलपुर हाथी अभयारण्य से 8.5 किलोमीटर दूर है। हाल के वर्षों में, इस जगह और इसके आस-पास के इलाकों में हाथियों के अलावा भालू, तेंदुए और दूसरे जंगली जानवर भी देखे गए हैं।

पर्यावरण मंत्रालय की वन परामर्श समिति (एफएसी) ने सात जुलाई को हुई अपनी बैठक में वन भूमि के बदलाव के पहले चरण को मंजूरी देने की सफारिश की। पहले चरण के लिए 3.3 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई करनी होगी।

पहले चरण की मंजूरी सर्शत दी गई है, जैसे क्षतिपूरक वनीकरण। दूसरे चरण के लिए वन भूमि में बदलाव की मंजूरी से पहले इन शर्तों का पूर्ण रूप से क्रियान्वयन सुनिश्चित करना शामिल है।

बैठक में समिति ने यह भी संज्ञान में लिया कि खनन स्थाल की पूर्वी और दक्षिणी सीमाएं ओल्हानी नदी से सटी हुई हैं।

ब्रह्मणी नदी की सहायक टिकरा नदी प्रस्तावित खनन पट्टा क्षेत्र के उत्तर में लगभग 750 मीटर की दूरी पर बहती है।

प्रस्तावित परियोजना के क्रियान्वयन के लिए 818 परिवारों को विस्थापित करना होगा और इससे पांच गांवों के 1,584 परिवार प्रभावित होंगे।

एफएसी ने कई शर्तों के आधार पर मंजूरी की सिफ़ारिश की है, जिनमें राज्य सरकार द्वारा ओल्हानी नदी के दोनों तरफ कम से कम 50 मीटर चौड़ा सुरक्षा अवरोधक सुनिश्चित करना भी शामिल है।

बैठक कार्यवाही विवरण के मुताबिक क्षेत्रीय वन्यजीव-प्रबंधन योजना को लागू करने की भी शर्त लगाई गई है, जिसे मुख्य वन्यजीव वार्डन ने मंजूरी दी है।

बैठक कार्यवाही विवरण के अनुसार ‘‘पेड़ों की कटाई चरणबद्ध तरीके से, राज्य वन विभाग के साथ सलाह-मशविरा करके और मंजूर की गई खनन योजना, खान को बंद करने की योजना और वन विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार की जाएगी’’।

भाषा धीरज वैभव

वैभव