नयी दिल्ली, आठ अप्रैल (भाषा) दिल्ली-एनसीआर में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों में चिंताजनक वृद्धि देखी जा रही है और निवारक जांच कराने वाले लोगों से 17 प्रतिशत मधुमेह, 19 प्रतिशत उच्च रक्तचाप, 23 प्रतिशत रक्त की कमी और 81 प्रतिशत मोटापे से ग्रस्त पाए गए हैं। एक निजी अस्पताल समूह की रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन नतीजों से यह साफ होता है कि बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए खास योजनाएं बनानी होंगी और समुदाय स्तर पर ज्यादा मजबूत कदम उठाने की जरूरत है।
यह आंकड़े अपोलो हॉस्पिटल्स द्वारा किए गए एक राष्ट्रव्यापी स्वास्थ्य मूल्यांकन का हिस्सा है, जिसमें कई शहरों में निवारक जांच का विश्लेषण किया गया।
यह विश्लेषण देशभर में 30 लाख से अधिक निवारक स्वास्थ्य जांच प्रतिभागियों पर आधारित है। यह रिपोर्ट बताती है कि शहरों की जीवनशैली की वजह से चयापचय बीमारियां धीरे-धीरे बढ़ रही हैं, लेकिन लोगों को इसका पता जल्दी नहीं चलता।
दिल्ली-एनसीआर के आंकड़े बताते हैं कि मोटापा बहुत तेजी से बढ़ रहा है। यही मोटापा आगे चलकर मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों का बड़ा कारण बन रहा है। इन बीमारियों की समस्या यह है कि शुरुआत में अक्सर इनका पता नहीं चल पाता।
राष्ट्रीय स्तर पर, रिपोर्ट समान चिंताओं को उजागर करती है, विशेष रूप से युवाओं के बीच। इसमें पाया गया कि लगभग एक लाख व्यक्तियों के समूह में से 30 वर्ष से कम आयु के आधे से अधिक व्यक्ति अधिक वजन के थे, जबकि कई में असामान्य कोलेस्ट्रॉल स्तर और विटामिन की कमी देखी गई, जो जीवनशैली से जुड़ी स्थितियों की जल्द शुरुआत का संकेत है।
करीब पांच लाख कामकाजी लोगों के स्वास्थ्य जांच के आधार पर पता चला कि 10 में से लगभग आठ लोग ज्यादा वजन वाले या मोटापे से ग्रस्त हैं। लगभग आधे लोगों ‘को ‘प्रीडायबिटीज’ या मधुमेह है, और हर चार में से एक व्यक्ति को उच्च रक्तचाप की समस्या है।
एक वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा, ‘खराब आहार, शारीरिक गतिविधि की कमी और उच्च तनाव वाली शहरी जीवनशैली, मोटापे और मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप जैसी संबंधित बीमारियों में खामोश वृद्धि ला रही है। चिंता की बात यह है कि इनमें से कई स्थितियां अब कम उम्र में ही पाई जा रही हैं।’
भाषा नोमान नोमान माधव
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