प्रधानमंत्री 21 अप्रैल को पचपदरा में करेंगे एचपीसीएल-राजस्थान रिफाइनरी का उद्घाटन

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प्रधानमंत्री 21 अप्रैल को पचपदरा में करेंगे एचपीसीएल-राजस्थान रिफाइनरी का उद्घाटन

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  • Publish Date - April 8, 2026 / 11:01 PM IST,
    Updated On - April 8, 2026 / 11:01 PM IST

जयपुर, आठ अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 21 अप्रैल को पचपदरा में एचपीसीएल-राजस्थान रिफाइनरी का उद्घाटन करेंगे।

इस परियोजना से पश्चिमी राजस्थान की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलने की आशा है। यह भी उम्मीद है कि वह देश के सबसे बड़े एकीकृत ‘रिफाइनरी-कम-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स’ में से एक बन सकती है।

करीब एक दशक से अधिक समय और कई सरकारों के दौर से गुजरने के बाद यह परियोजना अब साकार होने जा रही है।

‘नब्बे लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष (9 एमएमटीपीए) क्षमता वाली इस परियोजना की लागत अब दोगुनी होकर लगभग 80,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह पश्चिमी राजस्थान की अर्थव्यवस्था को बदलने और औद्योगिक विकास का नया अध्याय लिखने वाली परियोजना मानी जा रही है।

यह उद्घाटन ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक पेट्रोलियम और गैस आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री पचपदरा में रिफाइनरी के उद्घाटन के लिए राज्य का दौरा करेंगे, जो पहले बाड़मेर जिले का हिस्सा था, लेकिन अब नवगठित बालोतरा जिले में है।

उन्होंने मंगलवार रात ‘एक्स’ पर लिखा, “रिफाइनरी मारवाड़ क्षेत्र और पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगी और युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर खोलेगी। यह परियोजना राजस्थान में आर्थिक विकास के लिए जीवनरेखा साबित होगी।”

एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (एचआरआरएल) द्वारा स्थापित यह ‘ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-कम-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स’ हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और राजस्थान सरकार का संयुक्त उपक्रम है, जिसमें एचपीसीएल की हिस्सेदारी 74 प्रतिशत और राज्य सरकार की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत है।

कॉम्प्लेक्स की क्षमता नब्बे लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष (एमएमटीपीए) है, जिसमें 2.4 एमएमटीपीए पेट्रोकेमिकल उत्पाद शामिल हैं।

इस परियोजना की शुरुआत अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार (2008-13) के दौरान हुई थी। उस समय रेगिस्तानी क्षेत्र में बड़े तेल भंडार मिलने के बाद गहलोत सरकार ने रिफाइनरी की वकालत की थी।

मार्च 2013 में राजस्थान सरकार और एचपीसीएल ने इस कॉम्प्लेक्स के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। परियोजना का अनुमानित निवेश 37,230 करोड़ रुपये था और 22 सितंबर 2013 को सोनिया गांधी ने पचपदरा में रिफाइनरी की आधारशिला रखी थी।

हालांकि, दिसंबर 2013 में वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार आने के बाद परियोजना धीमी पड़ गई। नई सरकार ने समझौते की समीक्षा की और इसे राज्य के लिए वित्तीय रूप से प्रतिकूल बताया। बाद में 2017 में संशोधित एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए और केंद्र ने 43,129 करोड़ रुपये की लागत से परियोजना को मंजूरी दी।

जनवरी 2018 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पचपदरा में कार्यारंभ समारोह किया।

गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने परियोजना को कई वर्षों तक रोके रखा, जबकि भाजपा का कहना है कि पुन: बातचीत आवश्यक थी।

अशोक गहलोत ने कहा, “मुख्यमंत्री के रूप में मैंने तत्कालीन प्रधानमंत्री और सभी संबंधित पक्षों के साथ रिफाइनरी परियोजना को मंजूरी दिलाने के लिए कई प्रयास किए। मैंने हर मंच पर इस मांग को उठाया। शुरुआत में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) सहमत नहीं था, लेकिन लगातार प्रयासों के जरिए मैंने प्रधानमंत्री और संप्रग अध्यक्ष को इस परियोजना के लिए राजी किया।”

गहलोत ने कहा, “जब देश का लगभग 20 प्रतिशत तेल राजस्थान में उत्पादन हो रहा था, तो यहां रिफाइनरी क्यों नहीं स्थापित की जा सकती थी? यह एक बहुत बड़ी परियोजना थी, जो पश्चिमी राजस्थान की तस्वीर बदल सकती थी और देश के पेट्रोलियम क्षेत्र को बड़ा बढ़ावा दे सकती थी।’’

गहलोत ने कहा, “इस सोच के साथ कि यह परियोजना राजस्थान की किस्मत बदल सकती है। मैंने अपने प्रयास जारी रखे और अंततः केंद्र ने इसे राज्य के लिए मंजूरी दे दी।”

गहलोत ने भाजपा सरकार पर राजनीतिक कारणों से परियोजना में देरी करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, “दुर्भाग्यवश, सरकार बदलने के बाद भाजपा ने इस परियोजना को लटकाए रखा और इसमें पांच साल की देरी हो गई। सोनिया गांधी पहले ही शिलान्यास कर चुकी थीं। इसके बावजूद प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यारंभ किया, जो एक अच्छी लोकतांत्रिक परंपरा नहीं है।”

इस पर पलटवार करते हुए पूर्व नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि सोनिया गांधी ने चुनाव आचार संहिता लागू होने से कुछ दिन पहले ही शिलान्यास किया था और उस समय परियोजना के पास पर्यावरण स्वीकृति नहीं थी।

उन्होंने कहा कि यह परियोजना ‘लाइफलाइन’ साबित होगी और पश्चिमी राजस्थान को उसी तरह बदल देगी, जैसे इंदिरा गांधी नहर ने किया था।

उन्होंने कहा, “रेत के टीलों, कम जनसंख्या और रेगिस्तानी अर्थव्यवस्था के लिए जाने जाने वाले राज्य में यह रिफाइनरी औद्योगिकीकरण और आर्थिक विकास का नया अध्याय शुरू करेगी, जो पश्चिमी राजस्थान को एक बड़े औद्योगिक और पेट्रोकेमिकल हब में बदल देगी।”

परियोजना में एक ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण अनुकूल रिफाइनरी-कम-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स शामिल है। साथ ही राजस्थान के कच्चे तेल और आयातित कच्चे तेल के परिवहन के लिए पाइपलाइन, रिफाइनरी स्थल तक जल आपूर्ति पाइपलाइन, भंडारण सुविधाएं, टाउनशिप और अन्य सहायक बुनियादी ढांचा भी विकसित किया जाएगा।

राज्य खान विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, रिफाइनरी में राजस्थान में उत्पादित कच्चे तेल के साथ-साथ आयातित अरब मिक्स क्रूड को भी प्रोसेस किया जाएगा। यहां बीएस-6 ग्रेड पेट्रोल और डीजल के अलावा कई पेट्रोकेमिकल उत्पाद भी तैयार किए जाएंगे।

रिफाइनरी में 1.5 से 2.5 एमएमटीपीए तक राजस्थान के कच्चे तेल का उपयोग किया जाएगा और किसी भी कमी को आयातित कच्चे तेल से पूरा किया जाएगा।

अधिकारी ने बताया कि ब्यूटाडीन, जो रिफाइनरी के प्रमुख उत्पादों में से एक है, टायर उद्योग में इस्तेमाल होने वाले सिंथेटिक रबर के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है। इससे आयात पर निर्भरता कम होने और ऑटोमोबाइल क्षेत्र को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा, यह रिफाइनरी राज्य के पश्चिमी हिस्सों में निर्माण, परिवहन, फैब्रिकेशन, मशीनिंग भारी उपकरण आपूर्ति और सेवा क्षेत्रों के विकास को भी गति देगी।

भाषा बाकोलिया

राजकुमार

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