उत्तराखंड में ताप विद्युत परियोजना में अदाणी समूह के लिए 86 में 84 शर्तें बदली गईं: कांग्रेस
उत्तराखंड में ताप विद्युत परियोजना में अदाणी समूह के लिए 86 में 84 शर्तें बदली गईं: कांग्रेस
नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) कांग्रेस ने उत्तराखंड में 1,320 मेगावाट की प्रस्तावित ताप विद्युत परियोजना को लेकर बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि परियोजना से संबंधित निविदा प्रक्रिया की कुल 86 में से 84 शर्तें बदल दी गईं ताकि अदाणी समूह की कंपनी को फायदा मिल सके।
पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने यह दावा भी किया कि सार्वजनिक क्षेत्र के दो उपक्रमों (पीएसयू) की संयुक्त कंपनी से परियोजना छीनकर अदाणी समूह को दिए जाने के कारण राज्य के बिजली उपभोक्ताओं पर 25 साल में करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।
कांग्रेस के इस आरोप पर फिलहाल उत्तराखंड सरकार या अदाणी समूह की तरफ से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
खेड़ा ने संवाददाताओं से बातचीत में आरोप लगाया कि ‘पीएसयू’ यानी ‘पुष्कर सेलिंग उत्तराखंड’ (पुष्कर धामी उत्तराखंड बेच रहे हैं) एक बहुत ही गंभीर मामला है।
उनके अनुसार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2024 में केंद्र सरकार को पत्र लिखकर प्रस्तावित परियोजना को ‘यूजेवीएन लिमिटेड’ और ‘टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड’ के संयुक्त उपक्रम के माध्यम से विकसित करने की जानकारी दी थी और जुलाई 2024 में केंद्र से सैद्धांतिक मंजूरी भी मिली थी।
खेड़ा ने दावा किया कि 16 जनवरी, 2025 को समयसीमा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए इस सार्वजनिक क्षेत्र की परियोजना को छोड़ दिया गया तथा इसके बाद उत्तराखंड विद्युत निगम लिमिटेड (यूपीसीएल) ने तीन फरवरी 2025 को 1,320 मेगावाट बिजली की खरीद के लिए निविदा जारी की।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘केंद्रीय बिजली मंत्रालय के मानक निविदा दस्तावेज में 86 में से 84 बदलाव किए गए। इनमें परियोजना को उत्तराखंड के बजाय देश में कहीं भी स्थापित करने की अनुमति देना और बिजली को एक हजार किलोमीटर से अधिक दूरी तक पहुंचाने की लागत को बोलीदाता के बजाय सरकारी खजाने पर डालना शामिल है।’’
खेड़ा ने दावा किया कि निविदा में पहली इकाई के लिए निर्माण अवधि 42 महीने और दूसरी के लिए 48 महीने निर्धारित की गई, जबकि अदाणी पावर ने अक्टूबर, 2024 की एक सरकारी फाइलिंग में छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित परियोजना के विस्तार का 77 प्रतिशत काम पूरा होने की जानकारी दी थी।
कांग्रेस नेता के अनुसार, 25 अगस्त, 2026 को राज्य मंत्रिमंडल ने 25 साल के बिजली खरीद समझौते को मंजूरी दी, जिसके तहत 5.746 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदने का प्रावधान है।
उन्होंने सवाल किया कि सार्वजनिक क्षेत्र की परियोजना क्यों समाप्त की गई और निविदा की इतनी शर्तों में बदलाव क्यों किए गए?
खेड़ा ने यह भी कहा, ‘‘परियोजना को देश में कहीं भी स्थापित करने की अनुमति देने तथा फिक्स्ड चार्ज बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी?’’
भाषा हक हक पवनेश
पवनेश

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