घरों को गिराने में असम प्रशासन कानून का दुरुपयोग करता दिख रहा है: उच्च न्यायालय
घरों को गिराने में असम प्रशासन कानून का दुरुपयोग करता दिख रहा है: उच्च न्यायालय
गुवाहाटी, 17 सितंबर (भाषा) गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने कहा है कि असम प्रशासन गोलपाड़ा जिले में निजी भूमि पर बने 21 आवासीय मकानों को गिराने के मामले में कानून का “दुरुपयोग” करता हुआ प्रतीत हो रहा है।
न्यायमूर्ति देवाशीष बरुआ ने इस महीने की शुरुआत में निजी भूमि पर बने घरों को गिराए जाने के खिलाफ 21 लोगों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि निजी जमीन पर घरों को गिराने जैसी कठोर कार्रवाई को उचित ठहराने के लिए कोई पुख्ता सबूत मौजूद नहीं है।
अदालत ने 11 सितंबर को जारी आदेश में कहा, “बल्कि प्रथम दृष्टया यह आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के दुरुपयोग का मामला भी प्रतीत होता है।”
उच्च न्यायालय ने जिला आयुक्त और अंचल अधिकारी को इस कार्रवाई से संबंधित कार्यवाही के बारे में हलफनामा दाखिल करने का अवसर दिया।
न्यायमूर्ति बरुआ ने याचिकाकर्ताओं की ओर से दाखिल अतिरिक्त हलफनामे पर भी संज्ञान लिया, जिसमें की गई तोड़फोड़ की तस्वीरें और नुकसान का विवरण शामिल है।
इन दस्तावेजों को रिकॉर्ड में शामिल किया गया है।
न्यायाधीश ने अधिकारियों से इस अतिरिक्त हलफनामे पर जवाब दाखिल करने को कहा।
न्यायाधीश ने कहा कि अगर जिला आयुक्त और अंचल अधिकारी की ओर से की गई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कानून के तहत अधिकृत नहीं पाई जाती है तो अदालत यह तय करेगी कि पीड़ितों को मुआवजा दिया जाए या नहीं।
उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 अक्टूबर की तारीख तय की।
पांच सितंबर को गोलपाड़ा के मटिया के अंचल अधिकारी ने नोटिस जारी कर मकान मालिकों से 24 घंटे के भीतर अपने घर गिराने को कहा था।
नोटिस में ऐसा नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।
सात सितंबर तड़के 21 याचिकाकर्ताओं के आवासीय ढांचों को गिरा दिया गया।
ये सभी याचिकाकर्ता मुस्लिम समुदाय से हैं।
भाषा जितेंद्र नरेश
नरेश

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