नयी दिल्ली, दो जुलाई (भाषा) पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने बृहस्पतिवार को कहा कि किसी देश की महानता न केवल उसकी अर्थव्यवस्था से बल्कि इस बात से भी मापी जाती है कि वह उन लोगों के साथ कैसा व्यवहार करता है जो अपनी रक्षा खुद नहीं कर सकते।
उन्होंने महिलाओं के सशक्तीकरण और पशु कल्याण को ‘‘एक ही विचार की अलग-अलग अभिव्यक्ति’’ बताया।
पशु अधिकारों के लिए काम करने वालीं मेनका गांधी ने दिल्ली में ‘इंडियन विमेंस प्रेस कॉर्प्स’ में अपने संबोधन में कहा कि शोषण की शुरुआत उदासीनता से होती है और स्थायी बदलाव तब आता है जब नागरिक, उद्योग, सरकारें और संस्थाएं मिलकर बेहतर विकल्प तैयार करने के लिए काम करती हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘महिला सशक्तीकरण, पर्यावरण, पशु कल्याण और सामाजिक जिम्मेदारी को अक्सर अलग-अलग विषय माना जाता है। फिर भी, मेरा यह मानना है कि ये सभी एक ही विचार के अलग-अलग रूप हैं।’’
मेनका गांधी ने कहा, ‘‘किसी देश की महानता न केवल उसकी अर्थव्यवस्था से मापी जाती है, बल्कि इस बात से भी कि वह उन लोगों के साथ कैसा व्यवहार करता है जो अपनी रक्षा खुद नहीं कर सकते। यही वे मूल्य हैं जिनसे आने वाली पीढ़ियां हमारा आकलन करेंगी।’’
भाषा शफीक अविनाश
अविनाश