अहमदाबाद, 12 मार्च (भाषा) गुजरात विधानसभा में बृहस्पतिवार को कुपोषण के मुद्दे पर प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के बीच वाकयुद्ध हुआ। राज्य सरकार ने दावा किया कि कांग्रेस द्वारा उद्धृत आंकड़े पुराने हैं और हाल के वर्षों में स्थिति में काफी सुधार हुआ है।
सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच वाकयुद्ध तब शुरू हुआ जब कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी ने राज्य सरकार की आलोचना की और कहा कि गुजरात में भले ही भाजपा लगभग तीन दशक से सत्ता में है, बच्चों में कुपोषण अब भी गंभीर चिंता का विषय है।
मेवाणी ने कहा, “150 से अधिक सीट और 28 साल से सत्ता में होने के बावजूद भाजपा के शासन में एक आंकड़ा सामने आता है और वह है कि 100 में से 40 बच्चे कुपोषित हैं। इनमें से बहुत बड़ा हिस्सा आदिवासी समुदाय का है।”
मेवाणी ने यह बात राज्य के महिला और बाल विकास विभाग की बजटीय मांगों पर अपने कटौती प्रस्ताव पर बोलते हुए कही
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री मनीषा वकील ने कहा कि विपक्ष 2019 में किए गए राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के आंकड़ों पर भरोसा कर रहा है और उन्होंने विपक्ष को अपनी ”जानकारी दुरुस्त करने” को कहा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की पहल और निगरानी प्रणाली से पिछले कुछ वर्षों में कुपोषण के स्तर में काफी कमी आई है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले के सर्वेक्षणों में लगभग 40 प्रतिशत कुपोषण दिखा था, लेकिन अब यह संख्या तेजी से घट गई है।
मंत्री ने ताजा आंकड़ा साझा करते हुये कहा, “आज पोषण ट्रैकर सिस्टम के अनुसार, गुजरात में केवल 11.4 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं। इसका मतलब है कि लगभग 28.3 प्रतिशत की कमी आई है।”
इस दौरान विपक्षी बेंचों से लगातार हस्तक्षेप होते रहे।
वकील ने कांग्रेस पर तंज कसा और विधानसभा में उसकी घटती ताकत (12 विधायक) का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी को सदन में भी ‘कुपोषण’ का सामना करना पड़ रहा है। इस टिप्पणी से कांग्रेस सदस्य आक्रोशित हो गए।
कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक शैलेश परमार ने इस टिप्पणी पर आपत्ति जताई और व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार को विपक्ष के सदस्यों द्वारा उठाई गई चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए।
परमार ने कहा, ”अगर विपक्ष के सदस्य कोई तथ्य सामने लाते हैं, तो उसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। आज भी गुजरात के चार जिले देश के सबसे कुपोषित 10 जिलों में शामिल हैं। गुजरात के लोगों ने आपको ऐसे मुद्दों का समाधान करने के लिए सत्ता में भेजा है।”
विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी ने चर्चा के दौरान बार-बार हस्तक्षेप किया, सदस्यों से शांति बनाए रखने और मंत्री को अपने भाषण को पूरा करने की अनुमति देने का आग्रह किया।
भाषा रंजन पवनेश
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