AAP Raghav Chadha News: राघव चड्ढा का बदला पूरा!. कहा था, ‘घायल हूं, इसलिए घातक हूं’.. उठाया ऐसा कदम कि, अंदर तक हिली आम आदमी पार्टी

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Aam Aadmi Party Raghav Chadha News: आप के सात सांसदों के इस्तीफे से पार्टी को झटका, चुनावी तैयारी और संसद में संख्या बल प्रभावित हुआ

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  • Publish Date - April 25, 2026 / 06:44 AM IST,
    Updated On - April 25, 2026 / 06:46 AM IST

Aam Aadmi Party Raghav Chadha News || Image- ANI News File

HIGHLIGHTS
  • सात सांसदों के इस्तीफे से AAP को बड़ा राजनीतिक झटका
  • राज्यसभा में संख्या 10 से घटकर 3 रह गई
  • चुनावी रणनीति और संगठन पर असर की आशंका

नई दिल्ली: राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह और स्वाति मालीवाल जैसे प्रमुख चेहरों सहित सात सांसदों के शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (आप) छोड़ने के साथ, न केवल संसद में ‘आप’ का संख्या बल घटा है, बल्कि आगामी चुनावों के लिए उसकी तैयारियों में भी बाधा उत्पन्न हुई है। (Aam Aadmi Party Raghav Chadha News) बीते दो साल पार्टी के लिए काफी उथल-पुथल भरे रहने की पृष्ठभूमि में यह घटनाक्रम हुआ।

क्या आम आदमी पार्टी अपने सिद्धांतों एवं मूल्यों से भटक गई है?

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित इसके कई शीर्ष नेताओं को आबकारी नीति ‘घोटाले’ के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। उस दौरान, चड्ढा सहित दूसरी पंक्ति के नेता सरकार और संगठन, दोनों को सुचारू रूप से चलाने के लिए आगे आए थे। इन सात सांसदों में से कई को पार्टी की पहुंच को आकार देने में प्रमुख स्तंभ के रूप में देखा जा रहा था – चाहे वह नीतिगत अभिव्यक्ति हो, संगठनात्मक रणनीति हो, वित्त हो या फिर सार्वजनिक रूप से संदेश देना हो।

अब, उनके एक साथ पार्टी छोड़ कर जाने को एक नियमित राजनीतिक बदलाव से कहीं अधिक एक संगठनात्मक नुकसान के रूप में देखा जा रहा है। चड्ढा ने शुक्रवार को कहा कि सात सांसदों ने भाजपा में विलय कर लिया है और दावा किया कि आम आदमी पार्टी अपने सिद्धांतों एवं मूल्यों से भटक गई है। चड्ढा के अलावा, पाठक, मित्तल, सिंह और मालीवाल, राजेंद्र गुप्ता और विक्रम साहनी ने भी केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी छोड़ दी है। (Aam Aadmi Party Raghav Chadha News) ‘आप’ के सात सांसदों के इस्तीफे का समय पार्टी के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

पार्टी अगले साल गुजरात, गोवा और पंजाब में होने वाले चुनावों की तैयारी कर रही है। दिल्ली में पार्टी तीन बार सरकार बना चुकी है और उसका मजबूत जनाधार है। ‘आप’ नेताओं ने कहा कि पार्टी के जमीनी स्तर से जुड़ाव और शासन के सिद्धांत, नेताओं के जाने के बावजूद बरकरार हैं। पार्टी पंजाब में सत्ता में बनी हुई है और दिल्ली में भी उसकी उपस्थिति बरकरार है। साथ ही गुजरात और जम्मू कश्मीर में भी उसकी कुछ हद तक पहुंच है। हालांकि, राज्यसभा में उसके सदस्यों की संख्या 10 से घटकर महज तीन रह जाने के बाद अब सदन में उसकी मुखरता पर असर पड़ सकता है।

आप नेताओं ने साधा सांसदों पर निशाना, बताया ‘गद्दार’

गौरतलब है कि,  राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने शुक्रवार, 24 अप्रैल को आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। इसके अलावा, AAP के चार और राज्यसभा सांसदों के भी औपचारिक रूप से BJP में शामिल होने की उम्मीद है। राघव चड्ढा ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि (Aam Aadmi Party Raghav Chadha News) “भारत के संविधान के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए, राज्यसभा में AAP के दो-तिहाई से ज़्यादा सांसद BJP में शामिल हो गए हैं।”

बता दें कि, अरविंद केजरीवाल, स्वाति मालीवाल, अन्ना हजारे, संजय सिंह और AAP, BJP और कांग्रेस सहित अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के अन्य बड़े नेताओं ने राघव चड्ढा के BJP में जाने पर अपनी प्रतिक्रियाएं दी है।

अन्ना हजारे ने कहा, ‘लोकतंत्र में लोग स्वतंत्र’

राघव चड्ढा और अन्य नेताओं के BJP में शामिल होने पर प्रतिक्रिया देते हुए सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने कहा, “लोकतंत्र में, हर किसी की अपनी राय होती है। किसी के विचारों को दबाना सही नहीं है। लोकतंत्र में लोगों के अलग-अलग नज़रिए होते हैं, और राय में कुछ मतभेद होना स्वाभाविक है। सोच में कुछ असहमति या मतभेद हो सकते हैं, यही वजह है कि कुछ लोग पार्टी छोड़ने का फ़ैसला कर सकते हैं”  अन्ना हजारे ने इस मामले में आगे कहा कि, “संविधान में किसी भी पार्टी का नाम नहीं है… लोकतंत्र में लोग स्वतंत्र हैं, अगर कोई जाना चाहे तो जा सकता है।”

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Q1. AAP के सात सांसदों के इस्तीफे का क्या असर पड़ा है?

पार्टी का संख्या बल घटा, राज्यसभा में प्रभाव कम हुआ और चुनावी तैयारी प्रभावित हुई।

Q2. सांसदों ने पार्टी छोड़ने का क्या कारण बताया?

उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और मूल्यों से भटक गई है।

Q3. किन राज्यों में AAP की चुनावी तैयारी प्रभावित हो सकती है?

गुजरात, गोवा और पंजाब में आगामी चुनावों की रणनीति और संगठन पर असर पड़ सकता है।