क्रूरता के मामले में सीसीटीवी या चिकित्सा साक्ष्य न होना, आरोपी को बरी करने का आधार नहीं : अदालत
क्रूरता के मामले में सीसीटीवी या चिकित्सा साक्ष्य न होना, आरोपी को बरी करने का आधार नहीं : अदालत
नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने दहेज के लिए उत्पीड़न और क्रूरता के आरोपों का सामना कर रहे एक व्यक्ति को आरोपमुक्त करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि ऐसे अपराध अक्सर घर की चारदीवारी के भीतर होते हैं और हो सकता है कि इनके लिए कोई चश्मदीद गवाह या सीसीटीवी फुटेज न हो।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह, सुनील शर्मा की ओर से दायर एक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस याचिका में उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता और दहेज निषेध कानून के तहत उन पर आरोप तय करने का निर्देश दिया गया था।
अदालत ने 13 अगस्त के आदेश में कहा, “शिकायतकर्ता के इस दावे के समर्थन में कोई चिकित्सा साक्ष्य नहीं है कि उसके पति ने उसे पीटा था; इस दलील के संबंध में, मेरा मानना है कि आरोप तय करने के चरण में, शिकायतकर्ता के बयान की सच्चाई की जांच चिकित्सकीय साक्ष्य या किसी अन्य सबूत से पुष्टि के आधार पर नहीं की जानी चाहिए।”
अदालत ने कहा कि आरोप तय करने के चरण में, केवल यह देखना जरूरी था कि क्या रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से प्रथम दृष्टया मामला बनता है; शिकायतकर्ता के आरोपों की सच्चाई की जांच चिकित्सकीय या अन्य पुष्टिकारक सबूतों के आधार पर नहीं की जानी थी।
शर्मा की पत्नी ने आरोप लगाया था कि दिसंबर 2015 में शादी के कुछ समय बाद ही, शर्मा और उनके परिवार वालों ने उन्हें परेशान किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें कई बार पीटा गया और दहेज के लिए परेशान किया गया।
क्रूरता, आपराधिक विश्वासघात और दहेज के लिए परेशान करने से संबंधित प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
आरोपों को चुनौती देते हुए शर्मा ने दलील दी कि आरोप अस्पष्ट थे और उनके समर्थन में कोई चिकित्सकीय सबूत, चश्मदीद गवाह या सीसीटीवी फुटेज नहीं था।
उन्होंने यह भी दावा किया कि यह मामला तलाक की कार्यवाही के जवाब में किया गया कदम था।
भाषा प्रशांत माधव
माधव

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